उदयपुर। शहर के हाथीपोल थाना क्षेत्र में एक गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें बैंक की गिरवी रखी संपत्ति को लोन चुकाए बिना ही अन्य व्यक्तियों को बेच दिया गया। उदयपुर महिला समृद्धि अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की ओर से मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है।

पुलिस के अनुसार, 17 जून 2009 को मेहरुन्निशा मियाजी ने अपनी फर्म के व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए 8 लाख रुपए का बिजनेस लोन अपने मकान संख्या 1, डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग, कुतुबपुरा बोहरवाड़ी को बैंक के पास गिरवी रखकर लिया था। इस लोन के गारंटर अब्बास अली और दुर्गाशंकर भोई थे। बाद में मेहरुन्निशा मियाजी का निधन हो गया।

घटना के अनुसार, 26 नवंबर 2010 को उनके वारिसों – हातिम अलीमिया, शब्बीर अलीमिया और रियाज अलीमिया – ने बैंक की मोरगेज संपत्ति को मोहन सिंह कोठारी को बेच दिया। इसके बाद 2 सितंबर 2013 को मोहन सिंह कोठारी ने वही संपत्ति बीना भट्टाचार्य को हस्तांतरित कर दी। बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक इस संपत्ति पर कुल 21 लाख 86 हजार 48.84 रुपये का लोन शेष है।

उदयपुर पुलिस ने बैंक की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि यह मामला वित्तीय और कानूनी दृष्टि से गंभीर है, क्योंकि गिरवी संपत्ति की अवैध बिक्री से बैंक को वित्तीय नुकसान हो सकता है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी के गंभीर संकेत देता है, बल्कि बैंकिंग सुरक्षा और गिरवी संपत्ति के प्रबंधन की आवश्यकताओं पर भी सवाल उठाता है।

Pratahkal Bureau

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