हिंदू संस्कृति में प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना असंभव: हर्षवर्धन त्रिपाठी
विश्व संवाद केंद्र चित्तौड़ प्रांत द्वारा उदयपुर में आयोजित नारद जयंती समारोह में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों पर विचार रखे।

उदयपुर के बप्पा रावल सभागार में आयोजित देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह के दौरान मंच पर विचार व्यक्त करते मुख्य वक्ता हर्षवर्धन त्रिपाठी व अन्य अतिथि।
उदयपुर। विश्व संवाद केंद्र चित्तौड़ प्रांत के तत्वावधान में रविवार को ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया के पावन अवसर पर देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने वैचारिक गहराई के साथ अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि हिंदू संस्कृति और सभ्यता के मूल में प्रकृति विद्यमान है और इसके बिना जीवन की कल्पना करना भी संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्तमान समय में भारत में विकास और पर्यावरण संरक्षण के मध्य जो संतुलन स्थापित किया जा रहा है, वह वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेश अग्रवाल ने पत्रकारिता के आदर्शों को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक पत्रकारों को देवर्षि नारद के जीवन से प्रेरणा लेकर निर्भीक, निष्पक्ष और सत्यनिष्ठ होकर अपनी बात समाज के सम्मुख रखनी चाहिए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. महावीर कुमावत ने सामाजिक एकजुटता और समरसता को राष्ट्र के लिए अपरिहार्य बताते हुए एकता पर बल दिया। समारोह की अध्यक्षता विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला ने की, जबकि कार्यक्रम की औपचारिक प्रस्तावना सचिव प्रवीण कोटिया द्वारा प्रस्तुत की गई।
सत्र का कुशल संचालन भानुप्रिया ने किया और कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष द्वारा सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस गौरवशाली आयोजन में शहर के वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। यह आयोजन न केवल पत्रकारिता के आदि पुरुष देवर्षि नारद के मूल्यों को पुनर्जीवित करने वाला रहा, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर बौद्धिक विमर्श का भी प्रमुख केंद्र बना।

