उदयपुर में ग्राम रथ अभियान से 14 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिली योजनाओं की जानकारी
छह विधानसभाओं के 55 गांवों में एलईडी वैन के जरिए 13 विभागों की योजनाओं का प्रचार, झाडोल में रामाजी को मौके पर मिली पेंशन।

उदयपुर। राजस्थान सरकार की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने के ध्येय से संचालित 'ग्राम रथ' अभियान उदयपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में विकास की नई इबारत लिख रहा है। जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों के 55 से अधिक गांवों में पहुँचे इस अभियान ने मात्र दो दिनों में हजारों ग्रामीणों के जीवन में आशा का संचार किया है। 29 और 30 अप्रैल को आयोजित विशेष कार्यक्रमों के दौरान एलईडी वैन के माध्यम से कुल 14 हजार 198 ग्रामीण इस मुहिम से सीधे जुड़े, जिनमें 7,458 महिलाओं और 6,740 पुरुषों की सक्रिय भागीदारी दर्ज की गई। इस दौरान ग्रामीणों को योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु 14,271 प्रचार-प्रसार मार्गदर्शिकाएं और विभागीय साहित्य का वितरण किया गया। अभियान के तहत न केवल प्रगतिशील किसानों और ग्रामीण प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया, बल्कि लोक कलाकारों को कला जत्थों के माध्यम से एक प्रभावी मंच भी प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि जयपुर में आगामी 'जीआरएएम-2026' के उपलक्ष्य में 28 अप्रैल से शुरू हुए इस 15 दिवसीय जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से 13 विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी ग्राम पंचायतों तक पहुँचाई जा रही है। आंकड़ों के लिहाज से खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र दो दिनों में सबसे अग्रणी रहा, जहाँ 2,710 आगंतुकों ने भाग लिया और 2,700 साहित्य प्रतियों का वितरण हुआ। मावली क्षेत्र में 2,575 ग्रामीणों ने उत्साह दिखाया, जबकि झाड़ोल में 2,540, वल्लभनगर में 2,380, गोगुंदा में 2,223 और उदयपुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,770 लोगों ने अभियान का लाभ उठाया। ग्राम रथ में स्थापित सुझाव पेटी के माध्यम से ग्रामीण अपने विचार भी शासन तक पहुँचा रहे हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी संवाद का सुदृढ़ ढांचा तैयार हो रहा है।
अभियान की सफलता का जीवंत प्रमाण झाड़ोल क्षेत्र के ग्राम तलई निवासी रामाजी के रूप में सामने आया। लंबे समय से सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए प्रतीक्षारत रामाजी जब चंदवास में ग्राम रथ कार्यक्रम में पहुँचे, तो टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर ही उन्हें पेंशन स्वीकृति पत्र (पीपीओ) सौंप दिया। वर्षों का इंतजार खत्म होने पर रामाजी के चेहरे पर आई मुस्कान इस अभियान की सार्थकता को सिद्ध करती है। दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच रही योजनाओं की यह जानकारी ग्रामीणों के लिए न केवल सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के नए मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।

