उदयपुर: घंटाघर थाना क्षेत्र में फायरिंग और चाकूबाजी, रंजिश के चलते हुआ हमला
पुलिस ने गैंगवार की चर्चाओं को खारिज किया। मामूली रंजिश के कारण हुई वारदात, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान और तलाश जारी।

उदयपुर के घंटाघर थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात हुई फायरिंग और चाकूबाजी की सनसनीखेज वारदात किसी गैंगवार का परिणाम नहीं, बल्कि आपसी रंजिश और घूरकर देखने के मामूली विवाद का नतीजा थी। इस घटना में पुलिस की प्रारंभिक जांच ने उन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें इसे दो गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई बताया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि जिस मुख्य बदमाश का नाम घटना के तत्काल बाद सामने आया था, वह मौका-ए-वारदात पर मौजूद ही नहीं था।
पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशानुसार, दहशत फैलाने वाले आरोपियों को चिन्हित करने और उन्हें शीघ्र गिरफ्तार करने के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में डीएसटी को भी शामिल किया गया है, जो सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से संदिग्धों की घेराबंदी कर रही है। एएसपी सिटी उमेश ओझा ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सिलावटवाड़ी निवासी सलमान, मोहसीन उर्फ पिनाक्यू और मोहम्मद नाजिम बुधवार रात मोहल्ले के पीपली चौक स्थित एक दुकान के बाहर बैठे थे। तभी दो बाइकों पर सवार होकर आए अज्ञात बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग की और चाकू से हमला कर दिया।
इस हिंसक हमले में मोहसीन के हाथ, पैर और पीठ पर चाकू के गहरे घाव आए, जबकि नाजिम को भी चोटें पहुंचीं। सलमान के पीठ में रीढ़ की हड्डी में गोली धंस गई। उसे देर रात आपातकालीन ऑपरेशन के लिए ले जाया गया, लेकिन गोली हड्डी में गहराई तक फंसी होने के कारण उसे निकाला नहीं जा सका। थानाधिकारी करमवीर सिंह के अनुसार, घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए आरोपियों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है। पुलिस की सरगर्मी से जारी तलाश में यह स्पष्ट हुआ है कि मोहसीन, जो स्वयं एक हिस्ट्रीशीटर है, और उसके साथ मौजूद सलमान, जिनके खिलाफ पूर्व में मुकदमे दर्ज हैं, की हमलावरों के साथ किसी पुरानी रंजिश या घूरने को लेकर बहस हुई थी। इसी का बदला लेने और उन्हें 'सबक सिखाने' के इरादे से हमलावर वहां पहुंचे थे। पुलिस अब संदिग्धों की धरपकड़ के लिए निरंतर दबिश दे रही है।

