उदयपुर। ऐतिहासिक नगरी उदयपुर के आयड़ स्थित गंगोद्भव कुंड की बदहाली और लगभग 800 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर के अस्तित्व पर मंडराते संकट को लेकर क्षेत्रीय जनमानस में गहरा रोष व्याप्त है। इस प्राचीन धरोहर के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की महती आवश्यकता को रेखांकित करते हुए गंगोद्भव कुंड विकास समिति ने शुक्रवार को शहर विधायक ताराचंद जैन से भेंट कर उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।

समिति के सचिव महेश भावसार, पूर्व पार्षद मनोहर चौधरी और जगत नागदा के नेतृत्व में पहुंचे क्षेत्रवासियों ने विधायक को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि उचित देखरेख और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते सात वर्ष पूर्व इस अति-प्राचीन शिव मंदिर का गुंबद ढह गया था। अत्यंत खेद का विषय है कि इतने वर्षों का समय बीत जाने के उपरांत भी आज तक इसके पुनर्निर्माण अथवा पुरातात्विक संरक्षण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया गया कि गंगोद्भव कुंड न केवल स्थानीय निवासियों की अगाध धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी यह स्थल बेजोड़ है।

विदित रहे कि इस परिसर के समीप ही प्राचीन राजपरिवारों की छतरियां स्थित हैं, जिसके कारण यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विदेशी पर्यटक और इतिहास प्रेमी भ्रमण हेतु पहुंचते हैं। ज्ञापन में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि पुरातत्व विभाग और देवस्थान विभाग को बार-बार सूचित किए जाने के बावजूद अब तक संरक्षण कार्य धरातल पर प्रारंभ नहीं हो सका है। समिति ने विधायक से मांग की है कि इस स्थल को धरोहर स्वरूप संरक्षित कर इसे धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए ताकि मेवाड़ की इस अनमोल विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। यह ज्ञापन न केवल एक जीर्ण-शीर्ण ढांचे को बचाने की पुकार है, बल्कि उदयपुर की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

Pratahkal HQ

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