उदयपुर जिले के फलासिया ब्लॉक के अंजरोली खास गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक पंडित गौरव कृष्ण शास्त्री ने बृज भूमि और गोवर्धन पूजा के महत्व के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के जीवन की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

गुरु महिमा और शिक्षा का महत्व

कथा के दौरान ऋषि सांदीपनी के आश्रम में श्रीकृष्ण द्वारा शिक्षा प्राप्त करने के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने जीवन में गुरु और शिक्षा के महत्व को विस्तार से समझाया। पंडित शास्त्री ने कहा कि "गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीवन अधूरा है और शिक्षा ही व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करती है।"





कुरीतियों के विरुद्ध सामाजिक संकल्प

कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान पंडित शास्त्री ने इसे सामाजिक जागरूकता से जोड़ते हुए श्रोताओं से विशेष संकल्प दिलवाए। उन्होंने सभी को मदिरा पान नहीं करने, दहेज प्रथा का विरोध करने, पशु बलि नहीं देने तथा मांस भक्षण से दूर रहने की शपथ दिलाई। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर इन संकल्पों को अपनाने का प्रण लिया।

विवाह की मनमोहक झांकी और भक्तिमय वातावरण

कार्यक्रम के अंत में भक्तों ने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी का दर्शन किया और मधुर आरती में भाग लेकर भक्ति का आनंद लिया। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

Pratahkal Bureau

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