उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुंदा से जालसाजी और आश्चर्य का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ही नंबर, एक ही रंग और एक ही मॉडल की दो टाटा अल्ट्रोज कारें अलग-अलग शहरों में संचालित होने की बात उजागर हुई है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब गोगुंदा निवासी जयदीप सिंह पुत्र अजय सिंह झाला के पास भीलवाड़ा यातायात पुलिस का फोन पहुंचा। भीलवाड़ा ट्रैफिक शाखा में तैनात हेड कांस्टेबल लेहरू लाल ने वाहन मालिक जयदीप सिंह को फोन कर सूचित किया कि उनकी कार भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में खड़ी है, जिसे तुरंत हटाया जाए अन्यथा गाड़ी जब्त कर ली जाएगी।

इस चेतावनी पर जयदीप सिंह ने असमंजस व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी गाड़ी उनके घर के बाहर गोगुंदा में ही खड़ी है। वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए जब ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें तस्वीरें भेजीं, तो जयदीप सिंह के होश उड़ गए। तस्वीरों में भीलवाड़ा एसपी ऑफिस के बाहर ठीक उसी नंबर प्लेट वाली दूसरी कार खड़ी थी, जिस पर 'पुलिस' लिखा हुआ था और गाड़ी के भीतर पुलिस की टोपी भी रखी नजर आ रही थी। घटना में नया मोड़ तब आया जब इस गहमागहमी के बीच भीलवाड़ा एसपी कार्यालय के बाहर से एक अज्ञात व्यक्ति पुलिस की वर्दी में आया, खुद को कांस्टेबल राजू बताया और वह संदिग्ध गाड़ी लेकर मौके से फरार हो गया।

इस फर्जीवाड़े से घबराए वास्तविक वाहन मालिक जयदीप सिंह झाला ने तत्काल गोगुंदा थाने पहुंचकर लिखित रिपोर्ट दर्ज करवाई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एएसआई विनेश कुमार ने तत्परता दिखाई और भीलवाड़ा ट्रैफिक पुलिस से संपर्क साधकर आवश्यक जानकारी जुटाई। वर्तमान में उदयपुर और भीलवाड़ा पुलिस को इस गंभीर प्रकरण की सूचना दे दी गई है और पुलिस विभाग की पहचान का उपयोग कर फर्जी नंबर प्लेट से गाड़ी चलाने वाले अज्ञात आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है। यह घटना पुलिस सुरक्षा घेरे और वाहनों के पंजीकरण की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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