उदयपुर। इतिहास एवं संस्कृति के अकादमिक क्षेत्र में उदयपुर के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राजस्थान विद्यापीठ के इतिहास एवं संस्कृति विभाग की सहायक आचार्य डॉ. ममता पूर्बिया को उनके गहन शोध पत्र ‘नर्बदेश्वर मंदिर का स्थापत्य’ के लिए प्रतिष्ठित प्रोफेसर नीलिमा वशिष्ठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें राजस्थान हिस्ट्री कांग्रेस के 38वें अधिवेशन में ‘राजस्थान की कला एवं स्थापत्य का अध्ययन’ विषय के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुति के लिए चयनित होने पर प्रदान किया गया।

राजस्थान हिस्ट्री कांग्रेस के निर्धारित नियमों के अनुसार चयनित शोधकर्ताओं को पुरस्कार आगामी अधिवेशन में औपचारिक रूप से प्रदान किया जाता है। इसी क्रम में डॉ. ममता पूर्बिया को यह सम्मान राजस्थान हिस्ट्री कांग्रेस के 39वें अधिवेशन में प्रदान किया गया। इस अधिवेशन का आयोजन महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश और मेहरानगढ़ जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें देशभर से इतिहास, कला और संस्कृति के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

डॉ. ममता पूर्बिया ने अपने शोध पत्र में नर्बदेश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली, उसकी कलात्मक संरचना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का तथ्यपरक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उनके अध्ययन में मंदिर के निर्माण काल, शिल्पकला की विशेषताओं और सांस्कृतिक महत्व को प्रमाणिक स्रोतों के साथ रेखांकित किया गया, जिसे विद्वानों और इतिहासकारों द्वारा विशेष सराहना प्राप्त हुई।

इस सम्मान के साथ न केवल डॉ. ममता पूर्बिया के अकादमिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, बल्कि राजस्थान विद्यापीठ और उदयपुर का नाम भी इतिहास एवं संस्कृति के शोध क्षेत्र में और अधिक सशक्त रूप से स्थापित हुआ है।

Pratahkal Bureau

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