उदयपुर: श्रीयादे माता जन्मोत्सव पर गूंजी पैनोरमा और सार्वजनिक अवकाश की मांग, जल्द ही डोम और एलईडी लाइटों से जगमगाएगा दरौली मंदिर परिसर
उदयपुर के दरौली में श्रीयादे माता जन्मोत्सव पर भव्य आयोजन हुआ। भाजपा जिलाध्यक्ष पुष्कर लाल तेली ने मंदिर में डोम और एलईडी लाइट लगाने का भरोसा दिलाया। जिलाध्यक्ष गणेशलाल प्रजापत घासा ने मुख्यमंत्री से मां श्रीयादे पैनोरमा स्थापना और जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की पुरजोर मांग की। मेवाड़ प्रजापति समाज की सांस्कृतिक विरासत और विकास से जुड़ी पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

उदयपुर। मेवाड़ की पावन धरा पर भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब मेवलिया प्रजापति समाज पांच चौखला के संयुक्त तत्वावधान में दरौली स्थित श्रीयादे मंदिर परिसर में भव्य जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 20 जनवरी 2026, मंगलवार को आयोजित इस समारोह में न केवल श्रद्धा का सैलाब उमड़ा, बल्कि समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए बड़े संकल्प भी लिए गए। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा उदयपुर देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर लाल तेली ने समाज को आश्वस्त किया कि मंदिर परिसर के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने पूर्व में की गई अपनी घोषणा को दोहराते हुए कहा कि मंदिर में डोम का निर्माण और एक लाख बीस हजार रुपए की लागत वाली हाई-टेक एलईडी लाइटें अतिशीघ्र स्थापित कर दी जाएंगी, जिससे मंदिर की भव्यता में चार चांद लग जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान समाज की अस्मिता और पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग ने जोर पकड़ा। वागड़ मेवाड़ प्रजापति समाज संस्थान, उदयपुर के जिलाध्यक्ष गणेशलाल प्रजापत घासा ने समाज की कुलदेवी भक्त शिरोमणि मां श्रीयादे की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए नेशनल रोड डबोक से भटेवर के बीच एक भव्य पैनोरमा स्थापित करने की पुरजोर पैरवी की। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री महोदय एवं राजस्थान विरासत संस्थान एवं संवर्धन प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत को औपचारिक पत्र लिखकर पैनोरमा स्थापना की प्रक्रिया को गति देने का आग्रह किया है। यह कदम न केवल प्रजापति समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि मेवाड़ की पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
भक्ति के इस उल्लास के बीच गणेशलाल प्रजापत घासा ने सरकार से माघ शुक्ल पक्ष की द्वितीया, यानी श्रीयादे जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की भी मांग उठाई। समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि मां श्रीयादे के त्याग और भक्ति की गाथा जन-जन तक पहुँचाने के लिए इस दिन का राजकीय सम्मान मिलना आवश्यक है। इस आयोजन ने न केवल प्रजापति समाज की एकता को प्रदर्शित किया, बल्कि विकास और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक विजन भी पेश किया। दरौली के इस पावन प्रांगण से उठी यह मांग अब शासन और प्रशासन के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो आने वाले समय में समाज के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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