उदयपुर की 17 तहसीलों में गौ माता को राष्ट्रमाता बनाने हेतु विशाल रैली
गौभक्तों ने 17 तहसीलों में एक साथ निकाली शोभायात्रा, एडीएम को ज्ञापन सौंपकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की।

उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले में गौ माता के सम्मान, सुरक्षा और सेवा को समर्पित 'गौ सम्मान आह्वान अभियान यात्रा' ने जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। जिले की सभी 17 तहसीलों में एक साथ आयोजित इस विराट रैली के माध्यम से गौभक्तों ने केंद्र सरकार से गौ माता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने और संपूर्ण भारत में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु कठोर केंद्रीय कानून बनाने की पुरजोर वकालत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गौवंश को संवैधानिक संरक्षण दिलाकर उन्हें समाज में उचित सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना है।
अभियान के जिला प्रभारी धर्मेंद्र डांगी ने आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गिर्वा तहसील के अंतर्गत नगर निगम प्रांगण स्थित टाउन हॉल में हजारों की संख्या में गौभक्त एकत्रित हुए। यहाँ से यह जनसमूह एक भव्य शोभायात्रा के रूप में कलेक्ट्री मार्ग की ओर अग्रसर हुआ। कलेक्ट्री पहुँचकर प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम सिटी जितेंद्र ओझा को राष्ट्रपति व सरकार के नाम एक औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपा, जिसमें गौ माता की सेवा और सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की अनिवार्य आवश्यकता पर बल दिया गया।
यह शोभायात्रा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का अनूठा संगम रही। यात्रा के दौरान गौभक्तों ने श्रद्धापूर्वक गौ माता की आरती उतारी। मार्ग में गौवंश के महत्व को दर्शाती विभिन्न मनमोहक झांकियां सजाई गई थीं, जो आकर्षण का केंद्र रहीं। विशेष रूप से भजन-कीर्तन मंडलियों द्वारा किए जा रहे संकीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस धार्मिक व सामाजिक समागम में साध्वी ईश्वरी देवी, नारायण दास वैष्णव, रामस्नेही संप्रदाय के दयाराम महाराज, साध्वी सूरज दास, मेलडी माता जी के पुजारी विरमनाथ और कल्ला जी के महंत हेमंत जोशी जैसे प्रतिष्ठित संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस यात्रा को व्यापक समर्थन मिला। उदयपुर शहर के विधायक ताराचंद जैन, कांग्रेस जिला अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ और बार एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र जैन सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी व गौशाला संचालक इस अभियान में सक्रिय रूप से सम्मिलित हुए। जिले की सभी तहसीलों में एक साथ उठी यह मांग न केवल गौवंश के प्रति जनमानस की अगाध आस्था को दर्शाती है, बल्कि शासन-प्रशासन को गौ रक्षा के प्रति ठोस विधायी कदम उठाने के लिए एक स्पष्ट संदेश भी देती है।

