उदयपुर: स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को अदालत का सख्त आदेश, बकाया राशि मय ब्याज और हर्जाना चुकाने के निर्देश
उदयपुर न्यायालय ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को प्रार्थी देवेंद्र कुमार की बकाया क्लेम राशि 72,400 रुपये, 6% ब्याज और 5100 रुपये मुकदमे के खर्च सहित भुगतान करने का कड़ा आदेश दिया है। लोक अदालत के हस्तक्षेप के बाद भी पूर्ण भुगतान न करने पर कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है। बीमा क्लेम में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों के लिए यह फैसला एक बड़ी नजीर है।

उदयपुर। बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम के दावों को खारिज करने और उपभोक्ताओं को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान करने के मामलों में न्यायपालिका ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। झीलों की नगरी उदयपुर में लोक अदालत और न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को अपने हाथ पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा है। न्यायालय ने कंपनी को स्पष्ट आदेश दिया है कि वह प्रार्थी की बकाया चिकित्सा राशि को ब्याज और मुकदमे के खर्च सहित एक तय समय सीमा के भीतर अदा करे।
पूरा मामला प्रार्थी देवेंद्र कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ले रखी थी। सुरक्षा के इसी भरोसे के बीच, 2 दिसंबर 2023 को अचानक सीने में दर्द की शिकायत होने पर देवेंद्र कुमार को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उपचार के दौरान उनके कुल 3,21,450 रुपये खर्च हुए। स्वस्थ होने के पश्चात जब देवेंद्र कुमार ने नियमानुसार अपनी पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया, तो कंपनी ने संवेदनहीनता दिखाते हुए उनके दावे को खारिज कर दिया।
बीमा कंपनी के इस अड़ियल रवैये से हार न मानते हुए देवेंद्र कुमार ने न्याय की गुहार लगाते हुए लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए लोक अदालत ने पूर्व में कंपनी को पूर्ण राशि मय ब्याज भुगतान करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, आदेश के बावजूद स्टार हेल्थ इंश्योरेंस ने प्रार्थी को केवल 2,49,050 रुपये का ही आंशिक भुगतान किया और शेष 72,400 रुपये की राशि दबा ली। कंपनी की इस मनमानी के विरुद्ध देवेंद्र कुमार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुनः न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए 23 दिसंबर 2025 को स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के विरुद्ध निर्णायक आदेश जारी किए। अदालत ने कंपनी को निर्देशित किया है कि वह शेष 72,400 रुपये की राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,100 रुपये अतिरिक्त, एक माह के भीतर प्रार्थी को अदा करे। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो प्रार्थी बकाया राशि पर 9 प्रतिशत की उच्च वार्षिक दर से वसूली ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी होगा। यह फैसला उन तमाम बीमा धारकों के लिए एक बड़ी जीत है जो अक्सर कंपनियों की जटिल शर्तों और क्लेम रोकने की प्रवृत्ति का शिकार होते हैं।

Pratahkal Bureau
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