अधिवक्ता एवं पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर उदयपुर जिले में कोनोकार्पस वृक्षों के नए रोपण पर तत्काल रोक लगाने तथा पूर्व में लगाए गए वृक्षों को वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर चरणबद्ध तरीके से हटाने की मांग की है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, नागरिकों के स्वास्थ्य और स्थानीय जैव विविधता के हित में शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि विगत कुछ वर्षों में नगर निगम, विकास प्राधिकरण तथा अन्य संस्थाओं द्वारा शहर की सड़कों, डिवाइडरों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में कोनोकार्पस वृक्ष लगाए गए हैं। प्रारंभ में इसकी तीव्र वृद्धि के कारण इसे प्राथमिकता दी गई, लेकिन अब इसके पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को लेकर देशभर में गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। ज्ञापन में वर्ष 2023 में गुजरात सरकार द्वारा इस वृक्ष के नए रोपण पर प्रतिबंध लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

डॉ. विजय विप्लवी ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार इस वृक्ष की जड़ें अत्यधिक फैलाव वाली होती हैं, जिससे पेयजल पाइपलाइन, सीवरेज लाइन, भूमिगत केबल, भवनों की नींव तथा सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि पुष्पन काल में इसके परागकण वातावरण में फैलने से एलर्जी, अस्थमा, श्वसन संबंधी रोग और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कोनोकार्पस एक विदेशी प्रजाति है, जिसका स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में विशेष योगदान नहीं माना जाता। इस पर स्थानीय पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों तथा अन्य परागण करने वाले जीवों का आकर्षण अपेक्षाकृत कम होता है। इसके विपरीत राजस्थान की जलवायु के अनुरूप नीम, पीपल, बरगद, खेजड़ी, अर्जुन, शीशम, करंज, अमलतास, कचनार, गुलमोहर, लाल लसौड़ा, हारसिंगार, कनेर, चांदनी, मेहंदी तथा अन्य देशी प्रजातियों का रोपण पर्यावरण और जैव विविधता के लिए अधिक उपयोगी बताया गया है।

डॉ. विजय विप्लवी ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 48A एवं 51A(ग), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा राजस्थान नगर निगम अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना शासन और प्रशासन का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा मान्यता प्राप्त एहतियाती सिद्धांत, सतत विकास तथा लोक न्यास सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि संभावित पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए समय रहते निवारक कदम उठाना आवश्यक है।

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि जिले में कोनोकार्पस के नए रोपण पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही नगर निगम, नगर विकास प्राधिकरण, वन विभाग और उद्यान विभाग द्वारा पहले से लगाए गए वृक्षों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इन वृक्षों को हटाया नहीं जाता, तब तक पुष्पन अवधि में उनकी नियमित छंटाई कराई जाए, ताकि परागकणों से होने वाली संभावित समस्याओं को कम किया जा सके।

डॉ. विजय विप्लवी ने कहा कि झीलों की नगरी उदयपुर अपनी प्राकृतिक हरियाली और समृद्ध पर्यावरणीय विरासत के लिए विश्वभर में पहचान रखता है। ऐसे में भविष्य के सभी वृक्षारोपण कार्यक्रमों में स्थानीय जलवायु के अनुरूप देशी और पर्यावरण हितैषी प्रजातियों को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिला प्रशासन जनहित, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय करेगा।

Vikas Chawada (Udaipur)

Vikas Chawada (Udaipur)

नाम: विकास चावड़ा

वर्तमान पद: संवाददाता (दैनिक प्रातःकाल, फतहनगर क्षेत्र)

कार्यक्षेत्र: फतहनगर, तहसील: मावली, जिला: उदयपुर (राजस्थान)

अनुभव: साल 2020 से लगातार सक्रिय

बीट और मुख्य विषय 

  • स्थानीय समाचार: तहसील मावली के विभिन्न गांवों सहित फतहनगर-सनवाड़ पालिका क्षेत्र के स्थानीय समाचारों की नियमित कवरेज।
  • राजनैतिक एवं क्राइम: क्षेत्र की राजनीतिक हलचल, कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग।
  • जन समस्याएं व समसामयिक विषय: स्थानीय नागरिकों की समस्याएं, बुनियादी सुविधाएं और समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन व रिपोर्टिंग।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

हायर सेकेंडरी

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