उदयपुर जेल के शौचालय में मिले दो मोबाइल, तीन विचाराधीन बंदियों पर केस दर्ज
बैरिक 17 के शौचालय में फर्श खोदकर छिपाए गए थे फोन, सीसीटीवी फुटेज और महिला प्रहरी की सतर्कता से हुआ खुलासा।

उदयपुर। लेकसिटी की केन्द्रीय कारागार में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर बैरिक के शौचालय में मोबाइल छिपाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जेल प्रशासन की सतर्कता से शौचालय के फर्श में गड्ढा कर छिपाए गए दो मोबाइल फोन बरामद कर तीन विचाराधीन बंदियों के मोबाइल सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया गया है।
घटनाक्रम के अनुसार, बीती 30 अप्रैल को जेल की तलाशी टीम द्वारा बैरिक संख्या 17 का औचक निरीक्षण किया जा रहा था। तलाशी अभियान शुरू होने से ठीक पहले सीसीटीवी कक्ष में तैनात महिला प्रहरी कंचन ने टीम प्रभारी नेमीचन्द को अति महत्वपूर्ण सूचना दी कि बैरिक 17 में निरुद्ध कुछ बंदी संदिग्ध रूप से बार-बार शौचालय की ओर आवाजाही कर रहे हैं। इस इनपुट के आधार पर जब गहनता से पड़ताल की गई, तो पाया गया कि विचाराधीन बंदी मोहम्मद शाबिर पुत्र मोहम्मद अली, अल्फेज उर्फ अजमेरी पुत्र नवाब मोहम्मद और फरहान अख्तर पुत्र अब्दुल फरीद की गतिविधियां पूर्णतः संदिग्ध थीं।
सूचना की पुष्टि के लिए जब तलाशी टीम ने शौचालय के फर्श की बारीकी से जांच की, तो एक स्थान पर लोहे का सरिया जमीन में धंस गया, जिससे वहां गड्डा होने का संकेत मिला। प्रहरी रामस्वरूप ने जब उस चिन्हित स्थान की खुदाई की, तो मिट्टी के नीचे दबी एक प्लास्टिक की थैली बरामद हुई। उक्त थैली को खोलने पर उसके भीतर से दो मोबाइल फोन प्राप्त हुए, जिन्हें इन तीनों विचाराधीन बंदियों ने मिलीभगत कर वहां सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचाने के लिए छिपा रखा था। जेल प्रशासन की रिपोर्ट पर संबंधित पुलिस थाने में आरोपियों के विरुद्ध कारागार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर विस्तृत अनुसंधान कर रही है कि उच्च सुरक्षा वाली जेल के भीतर ये मोबाइल फोन कैसे पहुंचे और इनका उपयोग किन गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। यह कार्रवाई जेल के भीतर संचालित अवैध संचार तंत्र पर एक कड़ा प्रहार है।

