उदयपुर में बिना सर्जरी स्क्रू निकाला, 17 वर्षीय की जान बची
टीबी हॉस्पिटल में फ्लेक्सिबल ब्रान्कोस्कोपी से 32.4 मिमी स्क्रू बिना बेहोशी निकाला, जटिल मामले में 15–20 मिनट में सफल उपचार

उदयपुर। टीबी हॉस्पीटल के चिकित्सकों ने एक जटिल चिकित्सकीय मामले में 17 वर्षीय बच्चे की सांस नली में फंसे 32.4 मिमी के लोहे के स्क्रू को बिना चीर-फाड़ और बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा कौशल का परिचय दिया।
जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के बरेली का रहने वाला 17 साल का किशोर उदयपुर में अपने मामा के यहां आया हुआ था। मामा कारपेंटर का काम कर रहे थे, उसी दौरान बच्चे के हाथ में स्क्रू था। अचानक स्क्रू उसके मुंह में चला गया और सांस नली में फंस गया। इसके बाद उसे सांस लेने में दिक्कत और खांसी शुरू हो गई। बच्चे ने परिजनों को गले में स्क्रू जाने की जानकारी दी, जिसके बाद उसे तत्काल चिकित्सालय ले जाया गया। इस दौरान उसकी स्थिति बिगड़ती गई और उसे लगातार खांसी व सांस की तकलीफ होने लगी।
चिकित्सकों ने एक्सरे किया तो पता चला कि स्क्रू दाएं फेफड़े की सांस नली में फंसा हुआ है। इस कारण मरीज को छाती में दर्द, लगातार खांसी और बलगम में खून आने की समस्या भी हो गई थी। आरएनटी के प्राचार्य डॉ. राहुल जैन ने बताया कि यह एक जटिल मामला था, जिसमें सामान्यतः बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता होती है।
टीबी अस्पताल के सहायक प्रोफेसर डॉ. महेश माहिच ने बताया कि टीम ने फ्लेक्सिबल ब्रान्कोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए बिना मरीज को बेहोश किए और बिना किसी सर्जरी के स्क्रू को बाहर निकाला। यह प्रक्रिया करीब 15 से 20 मिनट में पूरी की गई।
सीनियर प्रोफेसर डॉ. महेंद्र कुमार बैनाड़ा ने बताया कि आमतौर पर सांस नली में फंसी वस्तु निकालने के लिए मरीज को बेहोश करना पड़ता है, लेकिन इस मामले में टीम ने जोखिम कम करते हुए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सफल उपचार किया।
इस सफल उपचार में डॉ. प्रकाश बिश्नोई, डॉ. भावना, डॉ. हेमकरण, डॉ. गोविन्द, डॉ. राहुल, नर्सिंग अधिकारी गीता और ओटी स्टाफ का विशेष योगदान रहा। इस घटना ने बिना चीर-फाड़ और बिना बेहोशी के जटिल प्रक्रियाओं को संभव बनाने की चिकित्सा क्षमता को उजागर किया है।

