उदयपुर: कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की आगोश में भटेवर, पाले की आशंका से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
उदयपुर के भटेवर क्षेत्र में शीतलहर और घने कोहरे का तांडव जारी है। तापमान में भारी गिरावट से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं खेतों में ओस जमने और पाला पड़ने की आशंका से किसान परेशान हैं। भंवर भट्ट और प्रकाश जैन सहित ग्रामीणों ने कड़ाके की ठंड और हाईवे पर कम दृश्यता के कारण उत्पन्न संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

भटेवर (उदयपुर)। राजस्थान के उदयपुर जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने जनजीवन को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। भटेवर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में तापमान में आई भारी गिरावट और हाड़ कंपा देने वाली शीतलहर ने सर्दी के सितम को चरम पर पहुंचा दिया है। प्रकृति के इस बदले स्वरूप ने जहां आम जनजीवन की रफ्तार थाम दी है, वहीं खेतों में लहलहाती फसलों पर मंडराते संकट ने अन्नदाताओं की रातों की नींद उड़ा दी है।
बुधवार को क्षेत्र में सुबह की शुरुआत घने कोहरे की सफेद चादर के साथ हुई, जिसने दृश्यता को इस कदर प्रभावित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर सफर करना जोखिम भरा हो गया। हाईवे पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और चालकों को दिन के उजाले में भी हेडलाइट्स का सहारा लेना पड़ा। कड़ाके की ठंड का आलम यह रहा कि लोग दिनभर अलाव जलाकर शरीर को तपाते रहे। दोपहर बाद सूर्य देव के दर्शन होने पर ही लोगों को ठंड से आंशिक राहत मिल सकी, लेकिन ठंडी हवाओं के थपेड़ों ने ठिठुरन को कम नहीं होने दिया।
क्षेत्र की इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा विधानसभा संयोजक भंवर भट्ट, पूर्व जिला उपाध्यक्ष प्रकाश जैन, मुकेश नागदा और निर्मल प्रजापत सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि पारे में आई इस बड़ी गिरावट ने पूरे क्षेत्र को बर्फ की मानिंद ठंडा कर दिया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह-सुबह खेतों में ओस की बूंदें जमने लगी हैं, जो कड़ाके की सर्दी का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
स्थानीय किसानों के लिए यह मौसम दोहरी चुनौती लेकर आया है। विभिन्न फसलों पर पाला पड़ने की प्रबल आशंका के चलते किसानों को अपनी मेहनत बचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। कोहरे और शीतलहर के इस गठजोड़ ने न केवल सड़कों पर आवागमन को प्रभावित किया है, बल्कि कृषि प्रधान इस क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ पर भी प्रहार किया है। मौसम का यह तीखा तेवर आने वाले दिनों में और क्या रंग दिखाएगा, इसे लेकर ग्रामीणों में संशय और भय का माहौल बना हुआ है।

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