अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस: उदयपुर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चर्चा
उदयपुर के वन भवन में विशेषज्ञों ने पेंथर की बढ़ती आबादी और घटते वन क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण पर विचार साझा किए।

उदयपुर। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर स्थानीय वन भवन में ग्रीन पीपल सोसायटी एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी एवं प्रेजेंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में पर्यावरणविदों, वन अधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जैव विविधता के संरक्षण और निरंतर बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए ठोस प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम में यूनिसेफ इंडिया के पूर्व पर्यावरण विशेषज्ञ एस. एन. दवे ने जैव विविधता संरक्षण की अनिवार्य आवश्यकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि पृथ्वी पर विद्यमान समस्त पेड़-पौधों, वन्यजीवों और सूक्ष्मजीवों का अस्तित्व एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़ा है, अतः इस श्रृंखला की किसी भी कड़ी के क्षतिग्रस्त होने से संपूर्ण पर्यावरणीय संतुलन के बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। गोष्ठी के दौरान उदयपुर क्षेत्र में पेंथर की बढ़ती आबादी और घटती वन्यजीव विविधता का विषय चर्चा के केंद्र में रहा। पर्यावरणविद प्रो. महेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि वनों में चीतल, सांभर और अन्य शिकार प्रजातियों का संरक्षण नहीं किया गया, तो पेंथर का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करना एक स्वाभाविक परिणति होगी।
ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर ने घटते वन क्षेत्रों, सिमटते जल स्रोतों और अनियंत्रित शहरीकरण पर गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने जोर देकर कहा कि वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग में कमी जैसे छोटे किंतु प्रभावी कदम जैव विविधता के संरक्षण में आधारभूत भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सेडूराम यादव, मुख्य वन संरक्षक सुनील चिदरी, उप वन संरक्षक मुकेश सैनी, शैतान सिंह देवड़ा, यादवेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, डॉ. ललित जोशी, वी.एस. राणा, यासीन पठान, डॉ. विजय कोहली, डॉ. सुमन भटनागर, अनिरुद्ध चुण्डावत और प्रीति मुर्डिया सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। यह आयोजन जैव विविधता के संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का बोध कराते हुए भविष्य की चुनौतियों के प्रति एक सचेत आह्वान के रूप में संपन्न हुआ।

