उदयपुर। धार्मिक नगरी उदयपुर के आयड़ स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में बुधवार को अपरा एकादशी के पावन अवसर पर 34वां संपूर्ण भगवद्गीता परायण अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। भक्ति और ज्ञान के इस अनूठे संगम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और श्रीमद्भगवद्गीता के मूलपाठ का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

कार्यक्रम के दौरान संयोजक संपतलाल माहेश्वरी ने उपस्थित जनसमूह को गीता पाठ की महिमा से अवगत कराते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसी क्रम में सुप्रसिद्ध गीतासेवी वीरपाल सिंह राणा ने 'ज्ञानकर्म संन्यासयोग' विषय पर गहन विवेचन प्रस्तुत करते हुए जीवन में इसके व्यावहारिक दर्शन को समझाया। आध्यात्मिक ऊर्जा को विस्तार देते हुए गीताव्रती सन्तोष दीदी ने आगामी परम पवित्र पुरुषोत्तम मास की महत्ता बताई और सभी भक्तों से इस पूरे माह प्रतिदिन विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने का विशेष आह्वान किया, जिससे कोई भी भक्त जुड़ सकता है।

एकादशी के विशेष उपलक्ष्य में मंदिर में ठाकुरजी की नयनाभिराम जलविहार झांकी सजाई गई तथा प्रभु को शीतल भोग अर्पित किए गए। इस गरिमामयी आयोजन में गीता परिवार उदयपुर के गिरधारी लाल बारहठ, देवेन्द्र श्रीमाली, विष्णु शंकर पालीवाल, राधा माहेश्वरी, लक्ष्मण कुंवर राणावत, सीमा कुमावत, राधेश्याम माहेश्वरी, सरस्वती माहेश्वरी सहित अनेक गणमान्य भक्त उपस्थित रहे। संपूर्ण परायण की पूर्णता के पश्चात भव्य महाआरती की गई और तत्पश्चात प्रसाद वितरण हुआ। अंत में श्रद्धालुओं ने एकादशी व्रत की कथा का श्रवण किया और भजन-सत्संग के माध्यम से प्रभु भक्ति में लीन होकर कार्यक्रम का समापन किया।

Pratahkal Newsroom

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