अम्बामाता क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते एक ही परिवार के तीन सदस्यों पर धारदार हथियारों से हमला करने वाले आरोपियों को कोर्ट ने जेल भेजा।

उदयपुर। शहर के अम्बामाता थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते एक ही परिवार के तीन सदस्यों पर धारदार हथियारों से प्राणघातक हमला करने वाले दो आरोपियों को अदालत से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और हमले की क्रूरता को देखते हुए दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है।
प्रकरण के अनुसार, मस्तान बाबा रोड अम्बामाता निवासी मोहम्मद ओवेश पुत्र अकरम ने 27 मार्च को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह रात्रि 9 बजे अपने घर के बाहर खड़ा था। इसी दौरान तीन बाइकों पर सवार होकर आए 7-8 हमलावरों ने तलवार, चाकू और अन्य धारदार हथियारों से उस पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। हमले में ओवेश को गंभीर चोटें आईं। शोर सुनकर जब उसे बचाने के लिए उसके जीजा शाहिद हुसैन बीच-बचाव करने आए, तो हमलावरों ने उन पर भी तलवार व चाकू से वार कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने ओवेश के पिता अकरम खान पर भी जानलेवा हमला किया और मौके से फरार हो गए।
इस सनसनीखेज वारदात के बाद न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे राम मनोहर लोहिया नगर, सज्जन नगर कच्ची बस्ती निवासी मोहम्मद अरमान उर्फ रहमान पुत्र मोहम्मद इरफान और दानिश पुत्र अब्दुल हनीफ की ओर से अदालत में जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक वन्दना उदावत ने कड़ा विरोध जताते हुए तर्क दिया कि आरोपियों ने बाप, बेटे और दामाद की हत्या करने की नीयत से उन पर घातक हथियारों का प्रयोग किया है। ऐसे जघन्य अपराध में लिप्त व्यक्तियों को जमानत का लाभ देना न्यायोचित नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम-3 के पीठासीन अधिकारी गणपत लाल विश्नोई ने अपराध की प्रकृति को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोनों आरोपियों के प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र को नामंजूर करने का आदेश सुनाया। न्यायालय के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि सरेआम हिंसा फैलाने वाले तत्वों के प्रति कानून कोई नरमी नहीं बरतेगा।

