उदयपुर: इंसाफ की आस में दर-दर भटकता पिता, बेटी की संदिग्ध मौत के 8 माह बाद भी गिरफ्त से दूर हत्यारे
उदयपुर के पदराड़ा में जया सुथार की संदिग्ध मौत के 8 महीने बाद भी आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। न्याय के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित पिता डालचंद ने अब एसपी से गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच और त्वरित गिरफ्तारी की मांग की है। जानिए इस संवेदनशील मामले की पूरी सच्चाई और क्यों अब तक खाली हैं पुलिस के हाथ।

उदयपुर। न्याय की उम्मीद में थकी आंखें और सिस्टम की चौखट पर न्याय की गुहार लगाते हुए एक लाचार पिता—यह मार्मिक दृश्य आज उदयपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में देखने को मिला। जहां आठ महीने पहले अपनी लाडली को खोने वाले एक पिता का धैर्य अब जवाब दे रहा है। जिला मुख्यालय के पदराड़ा में घटी उस काली रात की खौफनाक यादें आज भी डालचंद सुथार के जेहन में ताजा हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि कानून के लंबे हाथ अब तक मुख्य आरोपियों की गिरेबान तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह मामला महज एक मौत का नहीं, बल्कि पुलिसिया कार्यप्रणाली और न्याय की धीमी गति पर खड़े होते बड़े सवालों का है।
घटनाक्रम के अनुसार, 17 मई 2025 को पदराड़ा निवासी जया सुथार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस दिन एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। शुरुआत से ही इस मामले को संदिग्ध मानते हुए मृतका के पिता डालचंद ने हत्या की आशंका जताई थी, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा। हालांकि, घटना के आठ महीने बीत जाने के बावजूद जांच की सुई वहीं अटकी हुई है जहां पहले दिन थी। पुलिस की फाइलों में दर्ज आरोपी आज भी खुले आसमान के नीचे घूम रहे हैं, जबकि एक पीड़ित परिवार अपनी बेटी की तस्वीर लेकर इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
मामले की गंभीरता और पुलिस की कथित शिथिलता को देखते हुए, पीड़ित पिता डालचंद ने एक बार फिर उदयपुर एसपी की शरण ली है। उन्होंने एक औपचारिक शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। डालचंद का आरोप है कि इतने लंबे समय के अंतराल के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना जांच प्रक्रिया पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने अपनी लिखित शिकायत में स्पष्ट किया कि जब तक आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक उनकी मृत बेटी की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और न्याय की गुहार लगाई है।
जया सुथार की मौत का यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवारों के विश्वास की परीक्षा बन चुका है। आठ महीनों का लंबा इंतजार एक पिता के लिए किसी वनवास से कम नहीं है, जो अपनी बेटी को खोने के गम के साथ-साथ सिस्टम से भी लड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि एसपी को सौंपे गए इस नए मांग पत्र के बाद उदयपुर पुलिस क्या रुख अपनाती है और क्या पीड़ित परिवार को वह न्याय मिल पाएगा जिसका वे पिछले साल मई से इंतजार कर रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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