टीएसपी क्षेत्र में सोलर पंप योजना में गड़बड़ी: आदिवासी किसानों से अवैध वसूली के आरोप
झाड़ोल और फलासिया क्षेत्र के किसानों ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर 25,000 से 80,000 रुपये की अवैध वसूली और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

झाड़ोल और फलासिया क्षेत्र के आदिवासी किसान 24 फरवरी 2026 को सोलर पंप योजना में हुई अवैध वसूली के खिलाफ जिला कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे।
राजस्थान के टीएसपी क्षेत्र में आदिवासी किसानों के कल्याण के लिए संचालित सोलर पंप योजना विवादों के घेरे में आ गई है। नियमों के अनुसार, टीएसपी क्षेत्र में एसटी किसानों को सोलर पंप सेट पर 70% अनुदान उद्यान विभाग द्वारा और शेष 30% राशि TADA विभाग की ओर से दिए जाने का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। नियमों के अनुसार यह योजना पात्र आदिवासी किसानों के लिए पूर्णतः निःशुल्क है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
किसानों से हजारों की वसूली और शिकायत
झाड़ोल, फलासिया, कोटड़ा और गोगुंदा क्षेत्र में किसानों से 25,000 रुपये से लेकर 80,000 रुपये तक की मोटी राशि अवैध रूप से वसूले जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस शोषण के विरुद्ध आवाज उठाते हुए फलासिया क्षेत्र के पानारवा और गुराड गांव के दो किसानों ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी है। इसके अतिरिक्त, 24 फरवरी 2026 को पीड़ित किसानों ने 181 हेल्पलाइन एवं उद्यान विभाग जयपुर को ईमेल के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज करवाई है।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठे सवाल
यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल आदिवासी किसानों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजना में व्याप्त एक संभावित बड़े भ्रष्टाचार का मामला भी हो सकता है। यह मामला न केवल आर्थिक शोषण का प्रश्न है, बल्कि आदिवासी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा है। स्थानीय समाज और पीड़ितों ने जनहित में प्रशासन से कुछ प्रमुख मांगें की हैं।
त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की मांग
प्रशासन से मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण और प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, जिन किसानों से अवैध रूप से राशि ली गई है, उन्हें वह राशि तुरंत रिफंड की जाए और इस भ्रष्टाचार में लिप्त दोषी अधिकारियों व वेंडरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो। योजना में पारदर्शिता लाने हेतु सभी लाभार्थियों की सूची और भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।

Pratahkal Bureau
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