तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले और पदोन्नति पर जल्द फैसला, महासंघ की ACS से वार्ता
राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले और पदोन्नति समेत कई मांगों पर महासंघ की ACS स्कूल शिक्षा से अहम वार्ता हुई।

तस्वीर में जयपुर स्थित कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश यादव और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का प्रतिनिधिमंडल बैठक करते हुए नजर आ रहा है।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रतिनिधि मंडल की अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश यादव के साथ वार्ता संपन्न हुई। जयपुर में 05 अगस्त 2026 को हुई इस बैठक में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण, पदोन्नति सहित शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा ने सभी बिंदुओं पर सकारात्मक पहल करते हुए शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश यादव के समक्ष शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दे रखे। संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा में स्टाफिंग पैटर्न लागू कर वर्ष 2019-2020 से 2025-2026 तक क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों का शीघ्र आवंटन करने की मांग रखी गई।
वार्ता में शिक्षकों से विभिन्न प्रकार की वसूलियों को रोके जाने और पे-प्रोटेक्शन दिए जाने, जीपीएफ/एसआई ऋण एवं उपार्जित अवकाशों के नगद भुगतान की समय पर व्यवस्था करने, शालादर्पण एवं अन्य पोर्टलों को गुणवत्तापूर्ण विकसित कर समस्त सूचनाएं शालादर्पण से ही लिए जाने की मांग भी रखी गई।
महासंघ ने 33,000 संविदा शिक्षकों को प्रबोधकों की भांति नियमित किए जाने, शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किए जाने तथा 31 दिसंबर के बाद नियुक्त शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति से सभी परिलाभ दिए जाने के लिए वेतन भुगतान हेतु विकल्प पत्र की बाध्यता में शिथिलता प्रदान करने के आदेश जारी करने की मांग की।
इसके अलावा राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए कंप्यूटर अनुदेशक कैडर के सुदृढ़ीकरण और कैडर संशोधन समिति के निर्णय को लागू करने, शिक्षकों के सभी संवर्गों की पदोन्नति करने तथा विशेष रूप से तृतीय श्रेणी शिक्षकों की छह सत्रों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग उठाई गई। संगठन ने उच्चतम न्यायालय में जल्दी सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र देकर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त कराने की भी मांग की।
बैठक में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में नियुक्त शिक्षकों को पुनर्स्थापना का विकल्प देने, शिक्षा विभाग में नए जिलों के गठन के बाद शिक्षकों एवं कार्मिकों की वरिष्ठता यथावत रखने, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी एक ही पारी में लगाने तथा उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के शिक्षकों को भी परीक्षा जैसे कार्यों में सहयोग लेने के विषय पर चर्चा हुई।
महासंघ ने समसा द्वारा दी जाने वाली ग्रांट, प्रशिक्षण, पाठ्य पुस्तक और खेलकूद सामग्री आदि का वार्षिक कैलेंडर जारी करने, शिक्षक कल्याण बोर्ड का गठन करने, संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने तथा एमडीएम योजना के अंतर्गत बाल गोपाल योजना में दूध पाउडर के स्थान पर पशुपालकों से दूध क्रय कर उपलब्ध कराने एवं मोटा अनाज से बने खाद्य पदार्थ दिए जाने की मांग भी रखी।
वार्ता में शिक्षा विभाग में पारदर्शी स्थानांतरण नीति बनाने तथा तृतीय वेतन श्रृंखला के शिक्षकों सहित शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालय अध्यक्ष एवं प्रयोगशाला सहायकों के स्थानांतरण किए जाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सरकार की ओर से आयोजित इस वार्ता में उपशासन सचिव मोनिका बराला, निदेशक संस्कृत शिक्षा विभाग प्रियंका जोधावत और सलाहकार शिक्षा बी.के.गुप्ता उपस्थित रहे। संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संपत सिंह, अतिरिक्त महामंत्री बसन्त जिंदल और कोषाध्यक्ष कैलाश कच्छावा शामिल हुए।
वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश यादव ने संगठन की ओर से रखे गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

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