डूंगरपुर। आत्मशक्ति ट्रस्ट, वागड़ विकास संगठन और कुपोषण के विरुद्ध राष्ट्रीय संगठन की पहल पर शुरू हुई आदिवासी यात्रा इंडिजिनियस यात्रा शुक्रवार को मालमाथा गांव पहुंची। आदिवासी समुदाय की पारंपरिक संस्कृति, गीत, बीज और खेलों के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस यात्रा का स्वागत ग्रामीणों और महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और लोक आभूषणों के साथ किया।

ग्रामीणों ने यात्रा के बक्सों में पारंपरिक अन्न और बीज जैसे कोदरा, माल और मिक्की डालकर इस पहल में सक्रिय भागीदारी दिखाई। यात्रा के दौरान वागड़ विकास संगठन के सहयोजक विक्रम कटारा ने उपस्थित लोगों को बताया कि इस यात्रा के माध्यम से वागड़ क्षेत्र की जैविक विविधता, जंगली फसलें, औषधीय जड़ी-बूटियां और पारंपरिक अन्न के बीज संकलित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य इन प्राचीन संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।

वागड़ मजदूर किसान संगठन के मानसिंह ने अपने भाषण में बताया कि पूर्वजों द्वारा खाए जाने वाले पारंपरिक अन्न पोषक तत्वों से भरपूर थे और उनका सकारात्मक प्रभाव उनकी लंबी आयु पर देखा जा सकता है। इसी दौरान बैठक में दिगी से आए जया भारती, एडवोकेट ताराचंद वर्मा और देवीलाल बराड़ ने भी संबोधन किया। बैठक में राधा बाई, संगीता, चम्पा, ललिता और सविता सहित कई महिलाएं उपस्थित रहीं और यात्रा के महत्व पर चर्चा की।

इस पहल से आदिवासी ज्ञान, पारंपरिक बीज और लोक-संस्कृति के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि संस्कृति और जैविक संसाधनों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

Pratahkal Bureau

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