लावासरदारगढ़ (प्रात:काल संवाददाता)। ग्राम पंचायत सरदारगढ़ के अधीन स्थित एक खातेदारी भूमि में पिछले दो वर्षों से धधक रही कोयले की अवैध भट्टियाँ अब पूरे इलाके के लिए अभिशाप बन चुकी हैं। डांग की भेरूजी मार्ग पर सिंगड़ी वालों की बस्ती के सामने बनी इन 10 से 12 भट्टियों ने न केवल हजारों हरे-भरे पेड़ों की जान ले ली है, बल्कि इनके जहरीले धुएं से ग्रामीणों का सांस लेना भी दूभर हो गया है।

इस क्षेत्र में कोयला बनाने का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। बताया जाता है कि समीपवर्ती गाँव के एक समुदाय विशेष के लोग इन भट्टियों के जरिए लंबे समय से पर्यावरण को चीरते हुए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं। कारोबारियों ने चालाकी से इन अवैध भट्टियों को अंग्रेजी बबूल के घने झुरमुटों के बीच छिपा रखा है ताकि प्रशासन की नजरों से बचा जा सके। भट्टियों के आसपास स्थित शिवनगर और सिंगड़ी बस्ती के लोगों का जीवन इस धुएं से दूषित हवा के कारण असुरक्षित हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार मई 2025 में प्रशासन ने इन अवैध भट्टियों पर छापा मारकर जेसीबी की मदद से इन्हें नष्ट कर दिया था। तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद अवैध कारोबारी फरार हो गए थे। कुछ समय तक क्षेत्र में शांति रही, लेकिन अब वही गिरोह दोबारा सक्रिय हो चुका है। एक बार फिर वही स्थान कोयले के काले धंधे से धधक रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर तीन-चार दिनों के अंतराल पर भट्टियों में कोयले का नया दौर शुरू हो जाता है, जिससे लगातार जहरीला धुआं फैलता है। इस धुएं ने अब लोगों को बीमार कर दिया है। सलावट सिंघीवाल बस्ती के पवन (17) पुत्र जाला खींची करीब तीन माह तक श्वास और दमा जैसी गंभीर बीमारी से जूझते रहे। आरके अस्पताल कांकरोली और सरदारगढ़ अस्पताल में उनके इलाज पर लगभग 25 हजार रुपये खर्च हुए। इसी बस्ती के 12 वर्षीय विजय पुत्र सोहनलाल भी जहरीले धुएं से बीमार पड़ा और उसे भी अस्पताल में भर्ती कर खून चढ़ाना पड़ा।

ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अब यह जहरीली गैस इलाके के बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी है। भट्टियों के आसपास करीब 200 क्विंटल से अधिक कटी हुई लकड़ियों के ढेर लगे हुए हैं, जो इस अवैध कारोबार की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर इन अवैध भट्टियों को स्थायी रूप से नष्ट करने और जिम्मेदार व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दो वर्षों से जारी यह अवैध गतिविधि न केवल पर्यावरण के लिए विनाशकारी साबित हो रही है, बल्कि मानव जीवन पर भी सीधा हमला बन गई है।a

Pratahkal Bureau

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