उदयपुर। भक्ति और सृजनशीलता का संगम उस समय देखने को मिला जब ‘आओ मंदिर चलें’ भक्ति आंदोलन की टोली द्वारा आयोजित श्री रामायण चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में बच्चों की कला प्रतिभा ने सभी का मन मोह लिया। दीपावली की छुट्टियों में बच्चों को घर पर ही ‘श्री रामायण’ विषय पर चित्र बनाने और निर्धारित लिंक पर अपलोड करने का अवसर दिया गया था। इस अनोखी पहल ने बाल कलाकारों को न केवल अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता व्यक्त करने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों से भी गहराई से जोड़ा।

कार्यक्रम में उदयपुर के ख्यातनाम पिछवाई कलाकार राजाराम शर्मा, डॉ. शंकर शर्मा, डॉ. निर्मल यादव और डॉ. मनीषा चौबीसा निर्णायक मंडल में शामिल रहे। सभी निर्णायकों ने बच्चों के चित्रों का गहन मूल्यांकन कर उनमें से आठ उत्कृष्ट कृतियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कारों के लिए चयनित किया। निर्णायकों के समेकित निर्णय के बाद अंतिम परिणाम ‘आओ मंदिर चलें’ आंदोलन से जुड़े चित्रकार प्रो. सुशील निंबार्क और डॉ. पुष्कर लोहार द्वारा घोषित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं न केवल बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करती हैं, बल्कि उनमें भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और आदर्शों के प्रति सम्मान की भावना भी जगाती हैं। बच्चों की रंगों में डूबी कलाकृतियों ने श्री रामायण के चरित्रों, प्रसंगों और भावनाओं को जीवंत कर दिया, जिससे उपस्थित दर्शक भावविभोर हो उठे।

समापन के अवसर पर आयोजकों ने घोषणा की कि आने वाले समय में इस प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चे भारतीय अध्यात्म और कला की इस सुंदर यात्रा से जुड़ सकें।

Pratahkal Bureau

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