उदयपुर के शिल्पग्राम में गूंजेगी महादेव की गाथा, तमाशा शैली में सजेगी 'शिव महिमा' की भव्य प्रस्तुति
उदयपुर के शिल्पग्राम में 4 जनवरी को 'रंगशाला' के तहत 'शिव महिमा' नाटक का भव्य मंचन होगा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान के अनुसार, जयपुर की परंपरा नाट्य समिति द्वारा दिलीप भट्ट के निर्देशन में तमाशा शैली की यह संगीतमय प्रस्तुति रविवार सायं 7 बजे दर्पण सभागार में आयोजित की जाएगी। नि:शुल्क प्रवेश के साथ भक्त और कला प्रेमी महादेव की इस गाथा का आनंद ले सकेंगे।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर की सांस्कृतिक फिजां एक बार फिर शास्त्रीय और लोक कला के अनूठे संगम से महकने वाली है। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित मासिक नाट्य संध्या 'रंगशाला' के मंच पर इस रविवार, 4 जनवरी को भगवान शिव के अलौकिक स्वरूप और उनकी महिमा का जीवंत चित्रण किया जाएगा। शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में आयोजित होने वाली इस विशेष शाम में जयपुर की सुप्रसिद्ध 'परंपरा नाट्य समिति' द्वारा 'शिव महिमा' नाटक का मंचन किया जाएगा, जो दर्शकों को भक्ति और कला के एक नए धरातल पर ले जाने के लिए तैयार है।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने इस आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि केंद्र का निरंतर प्रयास रहा है कि लुप्त होती लोक शैलियों और उत्कृष्ट नाटकों को जन-जन तक पहुँचाया जाए। इसी कड़ी में रविवार सायं 7 बजे आयोजित होने वाला यह नाटक राजस्थान की पारंपरिक 'तमाशा' शैली पर आधारित एक संगीतमय प्रस्तुति है। तमाशा शैली अपनी विशिष्ट गायकी, संवाद अदायगी और लयात्मकता के लिए जानी जाती है, जिसमें शिव के पौराणिक आख्यानों को संगीत और अभिनय के माध्यम से पिरोया गया है।
इस भव्य प्रस्तुति के पीछे प्रख्यात रंगकर्मी दिलीप भट्ट का कुशल निर्देशन और परिकल्पना है। भट्ट ने तमाशा विधा की बारीकियों को आधुनिक रंगमंच के साथ इस तरह संयोजित किया है कि यह प्रस्तुति न केवल कला प्रेमियों के लिए बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी कौतूहल का विषय बनी हुई है। संगीतमय परिवेश में शिव के अर्धनारीश्वर रूप, उनके तांडव और लोक कल्याणकारी स्वरूपों की व्याख्या इस नाटक का मुख्य आकर्षण होगी।
प्रशासनिक और आधिकारिक स्तर पर इस आयोजन की सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। कला और संस्कृति के प्रति जनरुचि को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से निदेशक फुरकान खान ने घोषणा की है कि इस नाट्य संध्या में आमजन का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। शिल्पग्राम का दर्पण सभागार इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का साक्षी बनेगा, जहाँ जयपुर की परंपरा नाट्य समिति के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन न केवल उदयपुर के सांस्कृतिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, बल्कि यह लुप्त होती 'तमाशा' जैसी लोक विधाओं को संरक्षण देने का एक सशक्त प्रयास भी है।

Pratahkal Bureau
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