उपखंड झाड़ोल के सालूखेड़ा गांव का श्मशान स्थल वर्षों से जर्जर और असुविधाजनक हालत में है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान में आज तक कोई टिनशेड नहीं बनाया गया है, और बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार करना लगभग असंभव हो गया है। मजबूरी में शवों को खुले जमीन पर ही दहन करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, श्मशान तक पहुंचने वाला रास्ता भी कच्चा और असुरक्षित है, जो बरसात और आपातकालीन परिस्थितियों में वहां पहुंचना और भी मुश्किल बना देता है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत की अनदेखी के कारण यह समस्या दशकों से जस की तस बनी हुई है, और उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार करने की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

ग्रामीणों ने अधिकारियों से जल्द से जल्द श्मशान स्थल पर टिनशेड निर्माण और पक्की सड़क बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि यह समस्या दूर नहीं की गई, तो सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

इस मामले में स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का जोर इस बात पर है कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से तत्काल सुधार किए जाएँ ताकि वे अपने मृतक परिजनों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से विदा कर सकें।

सालूखेड़ा श्मशान की यह बदहाल स्थिति ग्रामीण जीवन की रोजमर्रा की समस्याओं और प्रशासनिक अनदेखी का एक गंभीर उदाहरण पेश करती है, जो तत्काल ध्यान और सुधार की मांग करती है।

Pratahkal Bureau

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