कानोड़ में गूंजा 'सुरक्षित बचपन' का संकल्प: जतन संस्थान ने सिखाया अच्छे और बुरे स्पर्श का फर्क
कानोड़ के मानपुरिया का गुड़ा स्थित नंद घर में जतन संस्थान द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को पोषण और किशोरियों को 'गुड टच-बैड टच' की जानकारी दी गई। निशीथेश्वर चौबीसा ने बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक सजगता पर विशेष जोर दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट जिसमें सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का अनूठा संगम है।

कानोड़ में गूंजा 'सुरक्षित बचपन' का संकल्प: जतन संस्थान ने सिखाया अच्छे और बुरे स्पर्श का फर्क
कानोड़ (उदयपुर)। बच्चों की सुरक्षा और पोषण को लेकर मानपुरिया का गुड़ा स्थित नंद घर आंगनबाड़ी केंद्र पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जतन संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस सत्र में न केवल धात्री महिलाओं और गर्भवती माताओं को पोषण के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि किशोरियों को 'गुड टच-बैड टच' (सहज-असहज स्पर्श) की बारीकियाँ समझाते हुए उन्हें आत्मरक्षा और सजगता का पाठ पढ़ाया गया। कार्यक्रम ने समाज के उस पहलू पर कड़ा प्रहार किया जहाँ जानकारी के अभाव में मासूमियत का फायदा उठाया जाता है।
संस्थान के क्लस्टर निशीथेश्वर चौबीसा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए धात्री, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को खान-पान में सकारात्मक परिवर्तन लाने पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए समझाया कि गर्भ में पल रहे बच्चे के उचित आहार की व्यवस्था ही उसके सुनहरे भविष्य की नींव है। इसके पश्चात, कार्यक्रम ने एक गंभीर मोड़ लिया जब चौबीसा ने किशोरियों और बालिकाओं के बीच 'सहज और असहज स्पर्श' के संवेदनशील विषय पर संवाद शुरू किया। उन्होंने एक बालक को उदाहरण के तौर पर आगे बुलाकर व्यावहारिक रूप से समझाया कि माता-पिता और डॉक्टर (चिकित्सकीय परामर्श के दौरान) के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति का स्पर्श स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
चौबीसा ने माता-पिता को आगाह करते हुए एक बड़ा जीवन मंत्र दिया कि जब तक आप किसी परिवार की पृष्ठभूमि या 'बायोग्राफी' को पूरी तरह न समझ लें, तब तक अपने बच्चों को उनके पास अकेला छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से पलायन करने वाले परिवारों को सचेत किया कि गांव और पीहर-ससुराल के परिचित माहौल में खतरे कम हो सकते हैं, लेकिन जब आप रोजगार के लिए पति के साथ बाहर किसी नए शहर या परिवेश में जाते हैं, तो वहां बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। इस दौरान किशोरियों ने भी खुलकर अपने विचार व्यक्त किए और सुरक्षा मानकों को समझा।
कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यकर्ता मोती डांगी ने सभी आगंतुकों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। जागरूकता के इस क्रम में धात्री महिला भगवती ने सहज और असहज स्पर्श से संबंधित मार्गदर्शिका को पढ़कर सुनाया, जिससे वहां मौजूद महिलाओं के बीच स्पष्ट समझ विकसित हुई। अंत में, निशीथेश्वर चौबीसा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इस विश्वास के साथ कार्यक्रम का समापन किया कि सजगता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। यह आयोजन क्षेत्र में बाल सुरक्षा और महिला स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना जगाने में मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Bureau
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