उदयपुर (वि.)। स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा का एक गंभीर उदाहरण झाड़ोल उपजिला चिकित्सालय में देखने को मिल रहा है, जहां ईसीजी तकनीशियन का पद वर्षों से खाली पड़ा है। अस्पताल में वर्ष 2010 से ईसीजी मशीन तो मौजूद है, परंतु प्रशिक्षित तकनीशियन के अभाव में हृदय रोगियों की जांच नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों को उदयपुर रेफर किया जाता है, जहां तक पहुंचने से पहले कई मरीज दम तोड़ देते हैं।

शुक्रवार शाम करीब चार बजे प्राप्त जानकारी के अनुसार, झाड़ोल अस्पताल में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हाल ही में 4 नवम्बर 2025 को झाड़ोल निवासी इन्द्रा देवी लक्षकार पत्नी नन्दलाल लक्षकार की हृदय संबंधी समस्या के दौरान समय पर ईसीजी जांच न हो पाने और रेफरल प्रक्रिया में विलंब के चलते रास्ते में ही मृत्यु हो गई। यह घटना स्थानीय स्तर पर गहरी चिंता का विषय बनी हुई है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एक दशक से अधिक समय से अस्पताल में मशीन होने के बावजूद तकनीशियन की अनुपलब्धता सरकार की लापरवाही को दर्शाती है। कई बार मांग उठाए जाने के बावजूद अभी तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। स्थानीय नागरिकों ने जनजाति क्षेत्रीय विकास एवं गृहरक्षा मंत्री बाबूलाल खराड़ी को पत्र लिखकर उपजिला अस्पताल में शीघ्र ईसीजी तकनीशियन की नियुक्ति करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तकनीशियन की तैनाती हो जाती है, तो अनेक गरीब एवं आदिवासी मरीजों की जान समय पर बचाई जा सकती है।

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में गहराते संकट की ओर भी इशारा करती है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में किसी और मरीज को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।

Pratahkal Bureau

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