उदयपुर।

राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, रंग-बिरंगी वेशभूषा और सुरम्य संगीत की धुनों ने मंगलवार रात उदयपुर में आयोजित एग्रीकल्चर एंड लाइवस्टॉक एंटरप्रेन्योरशिप पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका), राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग और केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन ने देशभर से आए प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या में लोक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक नृत्य एवं संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की लोक संस्कृति की जीवंत झलक पेश की। दर्शकों ने तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। मंच पर राजस्थानी घूमर, कालबेलिया और चकरी जैसे पारंपरिक नृत्यों ने सभी का दिल जीत लिया। इस अवसर पर राजीविका राज्य मिशन निदेशक नेहा गिरि, जिला परिषद सीईओ रिया डाबी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक संस्कृति हमारी अस्मिता की पहचान है और ऐसे आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।

इसी कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार को तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के मुख्य आतिथ्य में एक निजी होटल में हुआ। इस अवसर पर देशभर से विशेषज्ञ, नीति निर्माता, उद्यमी और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। कार्यशाला का उद्देश्य कृषि और पशुधन उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में नए आयाम स्थापित करना रहा।

मुख्य अतिथि डॉ. मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण ही विकसित भारत का आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा महिला अधिकारियों को सशक्त जिम्मेदारियां सौंपना इस दिशा में सकारात्मक कदम हैं। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की संकल्पना महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से ही साकार होगी।

डॉ. मीणा ने बताया कि वर्तमान में 7037 महिला बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंस गांवों में डोर-स्टेप बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जबकि 254 राजीविका कैंटीन महिलाओं द्वारा सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 54 हजार से अधिक महिला उद्यम — सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मसाला उद्योग, हस्तशिल्प, किराना और लेडीज स्टोर के रूप में स्थापित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय और आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

जनजातीय क्षेत्रों की चर्चा करते हुए मंत्री मीणा ने कहा कि उदयपुर संभाग जैसे क्षेत्रों में जहां भूमि और पशुधन संसाधन सीमित हैं, वहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आत्मनिर्भरता की राह में वरदान साबित हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि ऐसे क्षेत्रों में अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित कर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।

कार्यक्रम के दौरान इंडियन बैंक और राजीविका के मध्य महिलाओं की सुविधा के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस पर राजीविका की ओर से राज्य मिशन निदेशक नेहा गिरि और बैंक की ओर से एमडी शिव बजरंगसिंह ने हस्ताक्षर किए। यह हस्तांतरण डॉ. मीणा की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा, मुख्य वन संरक्षक सुनील छिद्री, इंडियन बैंक के एमडी शिव बजरंगसिंह, डीसीएफ अजय चित्तौड़ा और राजीविका जिला परियोजना प्रबंधक ख्यालीलाल खटीक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

इस आयोजन ने न केवल ग्रामीण महिला उद्यमिता को नई दिशा दी, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा को भी मंच पर सजीव कर दिया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि परंपरा और प्रगति का संगम ही ग्रामीण भारत के विकास का वास्तविक मार्ग है।

Pratahkal Bureau

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