उदयपुर में एक पुराने वित्तीय विवाद पर आए महत्वपूर्ण फैसले में कोर्ट ने चैक अनादरण के आरोपी को छह माह के कारावास और 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2016 से लंबित था, जिसमें आरोपी द्वारा उधार ली गई रकम के बदले दिया गया चैक बैंक से राशि अपर्याप्त होने के कारण अनादरित हो गया था।

प्रकरण के अनुसार सूरजपोल क्षेत्र स्थित मोहित इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नंदीकुमार ने आरोपी महेन्द्र कुमार भंडारी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। दोनों के बीच लंबे समय से जान-पहचान थी और इसी भरोसे के आधार पर आरोपी ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु तीस हजार रुपये उधार लिए। रकम लौटाने के लिए 27 जून 2016 का चैक सौंपा गया।

फरियादी ने चैक को 28 जून 2016 को बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वह अनादरित होकर लौट आया। इसके बाद 12 जुलाई 2016 को विधिक नोटिस जारी किया गया, जिसे लेने से भी आरोपी ने इंकार कर दिया।

मामला न्यायालय पहुंचने पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट, एनआई एक्ट केसेज क्रम-3, पीठासीन अधिकारी रेनु मोटवानी ने आरोपी को भारतीय परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए छह माह के कारावास की सजा निर्धारित की।

इस फैसले को चैक अनादरण जैसे बढ़ते मामलों पर कड़ा संदेश माना जा रहा है, जो वित्तीय लेनदेन में भरोसे और जिम्मेदारी की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करता है।

Pratahkal Bureau

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