TET विवाद: महासंघ ने शिक्षकों की सुरक्षा के लिए केंद्र से विधायी हस्तक्षेप मांगा
सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के फैसले के बाद 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के भविष्य पर बने संकट को दूर करने के लिए संसद में संशोधन की मांग की गई है।

जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी (बाएं से दाएं) रमेश चंद्र पुष्करणा और महेंद्र कुमार लखारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद शिक्षकों की सुरक्षा पर अपनी मांग रखते हुए।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर हाल ही में आए न्यायिक निर्णय के बाद देशभर में उत्पन्न असमंजस के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने केंद्र सरकार से तत्काल विधायी हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा शर्तों और अधिकारों की रक्षा के लिए संसद में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए, ताकि लाखों शिक्षकों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा और प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देशभर के शिक्षकों में असुरक्षा और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। उनका कहना था कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) द्वारा TET को न्यूनतम योग्यता घोषित किए जाने से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के अनुसार पूर्णतः वैध थीं।
महासंघ ने तर्क दिया कि इन नियुक्तियों पर बाद के मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के विपरीत है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल सेवा शर्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है।
इस संदर्भ में महासंघ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जाए और उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, चयन तथा वेतन निर्धारण जैसे अधिकार सुरक्षित रखे जाएं। साथ ही, संसद में विशेष विधायी प्रावधान लाकर उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की गई है।
महासंघ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि देशभर में फैले भ्रम को समाप्त किया जा सके। संगठन ने पूर्व प्रभाव से नियम लागू करने की अवधारणा पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इससे कानूनी अनिश्चितता और बढ़ रही है।
महासंघ के अनुसार, शिक्षकों के मनोबल और कार्यस्थल की स्थिरता का सीधा प्रभाव छात्रों की शिक्षा और पूरे शिक्षा तंत्र पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

Vikas Chawada (Udaipur)
नाम: विकास चावड़ा
वर्तमान पद: संवाददाता (दैनिक प्रातःकाल, फतहनगर क्षेत्र)
कार्यक्षेत्र: फतहनगर, तहसील: मावली, जिला: उदयपुर (राजस्थान)
अनुभव: साल 2020 से लगातार सक्रिय
बीट और मुख्य विषय
- स्थानीय समाचार: तहसील मावली के विभिन्न गांवों सहित फतहनगर-सनवाड़ पालिका क्षेत्र के स्थानीय समाचारों की नियमित कवरेज।
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- जन समस्याएं व समसामयिक विषय: स्थानीय नागरिकों की समस्याएं, बुनियादी सुविधाएं और समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन व रिपोर्टिंग।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
हायर सेकेंडरी
