उदयपुर। जिले के टीडी थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय किशोर ने कथित रूप से पुलिस की लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। मृतक ने घर के पीछे निर्माणाधीन मकान में फांसी का फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना से गांव में सनसनी फैल गई और परिजनों में आक्रोश व्याप्त है।

थानाधिकारी देवेंद्र सिंह के अनुसार मृतक की पहचान आशीष (17) पुत्र भैरूलाल मीणा निवासी फलखरां, टीडी के रूप में हुई है। रविवार देर रात उसने घर के पीछे बने अधूरे मकान के दरवाजे के छावड़े पर रस्सी से फांसी लगा ली। सोमवार सुबह जब उसकी मां केसरी और भाई टॉर्च लेकर बाहर गए तो निर्माणाधीन मकान में बेटे को लटका देख सन्न रह गए। उन्होंने तत्काल अपने पति को सूचना दी। पिता भैरूलाल ने मौके पर पहुंचकर बेटे को फंदे पर लटका देखा और सरपंच बंशीलाल मीणा को खबर दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, घटनास्थल की वीडियोग्राफी कर साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए एमबी चिकित्सालय भेजा।

मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में 5.65 लाख रुपये की चोरी के एक मामले में आशीष को कुछ साथियों के साथ आरोपी बनाया गया था। वह करीब छह महीने तक जेल में रहा और बाद में हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुआ। लेकिन इसके बाद भी पुलिस आए दिन किसी भी वारदात के बाद उसे पकड़ ले जाती थी। पिता ने बताया कि रविवार सुबह भी पुलिस टीम उसे उठाकर ले गई और बाद में छोड़ दिया। इस लगातार हो रही कार्रवाई से आशीष मानसिक दबाव में आ गया और डिप्रेशन का शिकार हो गया, जिसके चलते उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।

परिजनों का कहना है कि आशीष दसवीं कक्षा का छात्र था और पुलिस की कार्रवाई ने उसका मनोबल तोड़ दिया था। एक बार पुलिस उसे आमर्स एक्ट के तहत गिरफ्तार करने के लिए स्कूल तक पहुंच गई थी, लेकिन अध्यापक के हस्तक्षेप से वह बच गया। पिता ने यह भी बताया कि आत्महत्या से पहले आशीष ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो-तीन स्टोरी पोस्ट की थीं, जिनमें श्मशान घाट की जलती चिता और मौत से जुड़े भावनात्मक संदेश थे।

थानाधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि पिता की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शव का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड के समक्ष कराया गया, जिसमें मेडिकल ज्यूरिस्ट विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सचिन जैन के नेतृत्व में मेडिसिन विभाग के डॉ. शैलेंद्र गुप्ता की टीम शामिल रही। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन देते हुए शांति बनाए रखने की अपील की।

यह दुखद घटना न केवल एक परिवार की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि यह भी प्रश्न खड़ा करती है कि क्या न्याय प्रक्रिया के दौरान समाज के सबसे नाजुक वर्गों — किशोरों — को पर्याप्त संवेदनशीलता मिल रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story