नई दिल्ली। 12 राज्यों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्य सरकारों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि बीएलओ के काम के घंटे कम करने और उनकी जिम्मेदारियों को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों ने चुनाव आयोग की ओर से जारी SIR प्रक्रिया में ड्यूटी से छूट के लिए सही और स्पष्ट कारण प्रस्तुत किए हैं, उनके अनुरोधों पर राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरण को विचार करना चाहिए। इसके आधार पर उनकी जगह उपयुक्त अन्य कर्मियों को तैनात किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकारों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया कि आवश्यकतानुसार पर्याप्त कार्यबल उपलब्ध कराया जाए ताकि बीएलओ पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

यह आदेश तमिलनााडु की अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम, द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। पार्टी ने बीएलओ के काम न कर पाने की स्थिति में चुनाव आयोग की ओर से कार्रवाई को चुनौती दी थी। पार्टी का तर्क था कि अत्यधिक कार्यभार के कारण बीएलओ अपनी ड्यूटी ठीक ढंग से निभा पाने में असमर्थ हैं, बावजूद इसके उन पर जनप्रतिनिधि कानून की धारा 32 के तहत आपराधिक कार्रवाई की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से बीएलओ की कार्यशैली और उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करेगा बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को भी बढ़ावा देगा।

Pratahkal Bureau

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