सुनील कालरा उदयपुर शिकारपुर सिंधी पंचायत के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित
शक्तिनगर में आयोजित वार्षिक आम सभा के दौरान नई कार्यकारिणी का गठन, महासचिव ने पेश की सामाजिक सुधारों और रीति-रिवाजों में संशोधन की विस्तृत रिपोर्ट।

उदयपुर। शक्तिनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर के प्रांगण में सिन्धी समाज की अग्रणी संस्था 'पूज्य शिकारपुर सिंधी पंचायत' की वार्षिक आम सभा और आगामी तीन वर्षों के कार्यकाल हेतु नई कार्यकारिणी के चुनाव का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। समाज की प्रगति और सांगठनिक ढांचे को नई मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस सभा में निर्वाचन अधिकारी विशन दास देवानी के कुशल नेतृत्व में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ पूर्ण किया गया। इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दौरान समाज की एकता की मिसाल पेश करते हुए अध्यक्ष पद हेतु सुनील कालरा का चयन निर्विरोध किया गया। नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के गठन में समाज के अनुभवी वरिष्ठों के मार्गदर्शन और युवाओं की ऊर्जा के समन्वय पर विशेष बल दिया गया है, ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना कुशलता से किया जा सके।
महासचिव हीरानंद चैनानी ने सभा की कार्यवाही के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान समाज के सामूहिक रीति-रिवाजों में समय की आवश्यकतानुसार संशोधनों और उनकी समीक्षा पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित सदस्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर सामाजिक परंपराओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के दौरान निवर्तमान अध्यक्ष सुखराम सिंह बालचंदानी ने अपने विगत तीन वर्षों के कार्यकाल में पंचायत द्वारा निष्पादित विकास कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। इसी क्रम में, कोषाध्यक्ष मनोहर नागदेव द्वारा प्रस्तुत पिछले तीन वर्षों की ऑडिटेड आय-व्यय रिपोर्ट को उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से अपनी स्वीकृति प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के औपचारिक स्वागत से हुआ, वहीं समापन सत्र में समाज के वरिष्ठ सदस्यों का उनके योगदान हेतु आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर आयोजित स्नेह भोज में समाज बंधुओं ने बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश प्रसारित किया। सुनील कालरा के निर्विरोध निर्वाचन पर समाज के विभिन्न वर्गों ने हर्ष व्यक्त करते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं। यह आयोजन न केवल नई नेतृत्व शक्ति के उदय का गवाह बना, बल्कि सिंधी समाज की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को भी रेखांकित कर गया।

