कानोड़ में आवारा पशुओं का खूनी तांडव: बेबस जनता और कुंभकर्णी नींद में सोता पालिका प्रशासन
कानोड़ नगर में आवारा पशुओं और कुत्तों का आतंक चरम पर है। हाल ही में दिनेश कुमार कुदाल को एक सांड ने पटक कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पालिका प्रशासन की निष्क्रियता से जनता में भारी आक्रोश है। स्कूली बच्चों से लेकर राहगीर तक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पढ़िए कानोड़ की इस गंभीर समस्या पर हमारी विशेष रिपोर्ट।

कानोड़। नगर की शांत गलियों में इन दिनों दहशत का साया है, जहां कदम-कदम पर मौत और चोट का खतरा मंडरा रहा है। कानोड़ नगर पालिका क्षेत्र में आवारा पशुओं और हिंसक कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम नागरिक अपने ही घर से बाहर निकलने में खौफ महसूस कर रहा है। विडंबना यह है कि जिस प्रशासन के कंधों पर सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वह तमाशबीन बनकर किसी बड़े हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
नगर के हृदय स्थल कहे जाने वाले बस स्टैंड से लेकर न्यायालय चौराहा, बाहर का शहर, कानोड़ दरवाजा और सब्जी मंडी तक, हर जगह आवारा सांडों और कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। शिव गंज-सदर बाजार, नया बाजार, धींगों की घाटी और ब्रह्मपुरी जैसे घने रिहायशी इलाकों में इन पशुओं की आपसी भिड़ंत और राहगीरों पर हमले अब रोज की कहानी बन चुके हैं। सड़कों के बीचों-बीच सांडों की 'अटखेलियां' राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं।
इस आतंक की सबसे खौफनाक तस्वीर हाल ही में पालिका कार्यालय के समीप ही देखने को मिली। राह चलते दिनेश कुमार कुदाल पर एक आवारा सांड ने अचानक हमला कर दिया। सांड ने अपनी सींगों से कुदाल को हवा में उछालकर सड़क पर पटक दिया। इस दर्दनाक हमले में दिनेश कुमार कुदाल गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद नाजुक हालत में उदयपुर रेफर करना पड़ा। यह घटना प्रशासन की नाक के नीचे हुई, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता नहीं जागी।
दहशत का यह आलम केवल सांडों तक सीमित नहीं है। आवारा कुत्तों के झुंड ने स्कूली बच्चों का जीना मुहाल कर दिया है। नन्हे-मुन्ने बच्चे जब भारी बस्ते लेकर स्कूल के लिए निकलते हैं, तो ये कुत्ते उन पर झपट्टा मारकर न केवल उनके टिफिन छीन लेते हैं, बल्कि उन्हें नीचे गिराकर लहूलुहान भी कर देते हैं। कई बच्चे इन हमलों में घायल हो चुके हैं, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
नगर वासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। स्थानीय नागरिकों ने कड़े शब्दों में पालिका प्रशासन से मांग की है कि इन आवारा पशुओं और हिंसक कुत्तों को तत्काल पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। यदि शीघ्र ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का यह आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल, कानोड़ की जनता प्रशासन से केवल एक ही सवाल पूछ रही है—आखिर कब तक हम अपनी सुरक्षा के लिए दर-दर भटकते रहेंगे?

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