कानोड़। निकटवर्ती खेताखेड़ा गांव के लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में कथावाचक महंत बालकदास सिंगोली श्याम ने भगवान श्रीराम की भक्ति, सत्संग और अच्छे संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा में शिव विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण करने और जीवन में सदाचार अपनाने का आह्वान किया।

महंत बालकदास सिंगोली श्याम ने कहा कि भगवान का भजन करने से मन पवित्र होता है। मन को शुद्ध और निर्मल रखने के लिए निरंतर भगवत स्मरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी डॉक्टर या वैज्ञानिक ने ऐसी दवा नहीं बनाई है, जिससे मनुष्य के भीतर का लोभ, मोह और क्रोध पूरी तरह समाप्त हो जाए, लेकिन ईश्वर की भक्ति में वह शक्ति है, जो इन विकारों को दूर कर सकती है। उन्होंने कहा कि दान करने से धन पवित्र होता है और सेवा से जीवन सार्थक बनता है।

भक्ति में दिखावे की आवश्यकता नहीं

कथावाचक ने कहा कि भक्ति में किसी प्रकार के दिखावे की आवश्यकता नहीं है। सच्ची भक्ति की सुगंध अपने आप फैलती है। कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और भक्ति ही मनुष्य के लिए सबसे सरल मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से राम नाम को जीवन की औषधि मानकर ईमानदारी से जपते रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राम नाम के स्मरण से जीवन के अनेक कष्टों और मानसिक व्याधियों से मुक्ति का मार्ग मिलता है।

माता-पिता और गुरु की सेवा का दिया संदेश

महाराज ने बच्चों को अच्छे संस्कार देने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को बचपन से ही धर्म, संस्कार और सदाचार की शिक्षा दी जानी चाहिए। माता-पिता और गुरु भगवान के स्वरूप होते हैं, इसलिए उनकी सेवा और सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने तथा भगवान का स्मरण करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आज समाज में शास्त्रों और संस्कारों से दूरी बढ़ने के कारण अनेक प्रकार की विकृतियां और अपराध बढ़ रहे हैं। यदि व्यक्ति धर्म, संस्कार और शास्त्रों के बताए मार्ग पर चले तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

शिव विश्वास और पार्वती श्रद्धा का प्रतीक

श्रीराम कथा में शिव विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए सीताराम महाराज ने भगवान शिव को विश्वास और माता पार्वती को श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में विश्वास और श्रद्धा का होना आवश्यक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई भक्ति मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत बनाए रखती है।

उन्होंने कहा कि अन्नदान, ज्ञानदान, कन्यादान, स्वर्णदान और भूमिदान को शास्त्रों में महादान की श्रेणी में बताया गया है। मनुष्य को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता और सेवा करते रहना चाहिए।

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर परिसर में भजनों और राम नाम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथावाचक ने श्रद्धालुओं से जीवन में भगवान की भक्ति को अपनाकर सदाचार, सेवा, संस्कार और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

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Bharat Jaroli, Udaipur

Bharat Jaroli, Udaipur

नाम: भरत कुमार जारोली

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: कानोड़ (तहसील: कानोड़, जिला: उदयपुर, राजस्थान)

बीट : स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भरत कुमार जारोली राजस्थान के उदयपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कानोड़ तहसील और उसके आसपास के क्षेत्रों के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वह अपने क्षेत्र में पुलिस थाना, अस्पताल, स्थानीय प्रशासन, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों सहित सभी विषयों पर नियमित रूप से समाचार कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

भरत कुमार जारोली को पत्रकारिता के क्षेत्र में 35 वर्षों का लंबा और व्यापक अनुभव है। वह साल 1982 से लगातार 'प्रातः काल' दैनिक समाचार पत्र के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पूर्व वह 'राजस्थान पत्रिका' (उदयपुर) से जुड़े हुए थे, जहाँ उन्होंने 35 वर्षों तक नियमित रूप से काम किया।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की है।

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