उदयपुर (वि.)। झीलों की नगरी उदयपुर में बुधवार को एक अद्वितीय आध्यात्मिक आयोजन का दृश्य देखने को मिला, जब आचार्यश्री महाश्रमण ने शहर के महाप्रज्ञ विहार से विहार आरंभ किया। दोपहर के समय जैसे ही आचार्यश्री संतों के साथ विहार करने निकले, हजारों श्रद्धालु उनकी भव्य जयकारों के साथ स्वागत के लिए उमड़ पड़े। भक्तों की भीड़ में जनमेदिनी आचार्यश्री के विहार के दृश्य को देखकर भाव विभोर हो गई। इससे पहले महाप्रज्ञ ने दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अभय दान को सबसे बड़ा दान बताते हुए विस्तार से समझाया।

इस अवसर पर एक विशेष आध्यात्मिक घटना भी घटी। तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक पगारिया के अनुसार, आचार्यश्री महाश्रमण अपनी धवल सेना के साथ महाप्रज्ञ विहार से दोपहर सवा तीन बजे देवेन्द्रधाम की ओर विहार के लिए रवाना हुए। वहां आचार्यश्री का राष्ट्रसंत पुलकसागर महाराज के साथ आध्यात्मिक मिलन हुआ। दोनों जैनाचार्यों ने जैन एकता और समाज में नैतिक मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया। इस आध्यात्मिक संवाद के दौरान साधु-संतों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गंभीरता और श्रद्धा को और बढ़ाया। 15 मिनट की इस मुलाकात के बाद, दोनों राष्ट्रसंत हाथ में हाथ डालकर देवेन्द्रधाम से बाहर आए, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावनाओं से ओतप्रोत हो गए।

कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे। जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने महाश्रमण का आशीर्वाद प्राप्त किया और कहा कि आप जैसे संत समाज में नैतिकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पुलक चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद फांदोत, ओसवाल सभा के अध्यक्ष प्रकाश कोठारी, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा और भाजपा नेता प्रमोद सामर ने भी इस आयोजन में भाग लिया।

इस प्रकार उदयपुर में दो जैनाचार्यों का यह आध्यात्मिक मिलन न केवल धर्म और एकता का प्रतीक बना, बल्कि भक्तों और समाज के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश का एक महत्वपूर्ण अवसर भी सिद्ध हुआ।

Pratahkal Bureau

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