जंगलों के ‘प्राकृतिक माली’ हैं भालू: वैज्ञानिक शोध ने खोली बीज प्रसार के अनूठे रहस्य की परत
क्या आप जानते हैं कि भालू सिर्फ वन्यजीव नहीं, बल्कि भविष्य के जंगलों के रक्षक भी हैं? राजस्थान के अभयारण्यों में हुए एक नए शोध ने भालुओं की बीज-वितरक के रूप में एक अनोखी भूमिका का खुलासा किया है। जानें कैसे भालू जंगलों को नया जीवन दे रहे हैं।

राजस्थान के अभयारण्यों में वैज्ञानिक शोध के अनुसार स्लॉथ भालू देशी वनस्पतियों के प्रसार और वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
उदयपुर। आमतौर पर भालू को केवल एक हिंसक वन्यजीव के रूप में देखा जाता है, लेकिन राजस्थान के कुंभलगढ़ एवं टोडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्यों में हुए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन ने उनकी एक नई और बेहद अहम भूमिका को उजागर किया है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका 'बायोट्रोपिका' में प्रकाशित यह शोध बताता है कि स्लॉथ भालू जंगलों के प्राकृतिक माली हैं और महत्वपूर्ण बीज-वितरक के रूप में वनों के पुनर्जनन में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं।
युवा शोधकर्ता डॉ. उत्कर्ष प्रजापति के नेतृत्व में हुए इस विस्तृत अध्ययन में भालुओं के भोजन और उनके मल का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि सर्दियों के दौरान भालुओं के आहार में जंगली फलों की प्रधानता होती है, जबकि गर्मियों में वे मुख्य रूप से दीमक और चींटियों पर निर्भर रहते हैं। यह उनके अनुकूलन की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है। अध्ययन का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि भालुओं द्वारा खाए गए कई पौधों के बीज उनके पाचन तंत्र से गुजरने के बाद भी न केवल जीवित रहे, बल्कि सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक तेजी से अंकुरित हुए। फ़राग़ान, बेर, अमलतास, तेंदू और जंगली खजूर जैसी देशी वनस्पतियों के प्रसार में भालू एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रहे हैं, जो बीजों को लंबी दूरी तक फैलाकर वनस्पति विविधता को समृद्ध करते हैं।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक चिंताजनक पहलू की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। लैंटाना (Lantana camara) नामक विदेशी आक्रामक प्रजाति के बीज भी भालुओं के मल से अंकुरित हो रहे हैं। डॉ. के. एस. गोपी सुंदर और डॉ. विजय कुमार कोली के अनुसार, लैंटाना का प्रसार भारत के वनों में देशी वनस्पतियों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि भालुओं का संरक्षण केवल एक प्रजाति की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र और भविष्य के जंगलों को जीवित रखने का आधार है। यह सिद्ध हो चुका है कि स्लॉथ भालू खाद्य श्रृंखला का एक सक्रिय हिस्सा होने के साथ-साथ जंगलों के ऐसे मूक संरक्षक हैं, जो आज बीज बोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए वनों की नींव तैयार कर रहे हैं।

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