सिंघानिया यूनिवर्सिटी द्वारा अतिरिक्त भूमि आवंटन और जल प्रदूषण का विरोध
उदयपुर के भटेवर में ग्रामीणों ने विश्वविद्यालय पर नियमों के विरुद्ध 108 बीघा अतिरिक्त भूमि कब्जाने और तालाब में सीवरेज डालने का आरोप लगाते हुए एसडीएम को ज्ञापन दिया।

उदयपुर के वल्लभनगर में सिंघानिया यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रदर्शन करते ग्रामीण और मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते वल्लभनगर मंडल अध्यक्ष बाबूलाल डांगी व अन्य प्रतिनिधि।
नियमों के विरुद्ध भूमि आवंटन का आरोप
ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए आवंटन की विसंगतियों को उजागर किया:
- "वर्ष 2006 में 56 बीघा एवं वर्ष 2008 में 108 बीघा भूमि सहित कुल 164 बीघा भूमि विश्वविद्यालय को आवंटित की गई।"
- "नियमानुसार 30 एकड़ यानी 56 बीघा भूमि का ही आवंटन किया जा सकता था, किंतु नियमो को ताक में रखकर 108 बीघा अतिरिक्त भूमि का आवंटन कर दिया गया।"
- इस आवंटन से सरकारी भूमि एवं चारागाह भूमि प्रभावित हुई है, जहाँ पूर्व में सामुदायिक भवन एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के निर्माण भी थे।
पर्यावरण और पशुधन पर गंभीर संकट
विश्वविद्यालय द्वारा भटेवरिया तालाब में सीवरेज का गन्दा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास की कृषि भूमि बंजर होती जा रही है और किसानों एवं पशुपालकों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
ग्रामीणों ने दूषित पानी के दुष्प्रभावों के बारे में बताया कि:
- "दूषित पानी के कारण पशुधन बीमार हो रहे है, कई पशुओं की मृत्यु भी हो चुकी है।"
- "तालाब में मछलियों की भी मृत्यु होने की बात सामने आई है।"
- "नालों के मूल स्वरूप में भी परिवर्तन कर दिया गया है, जिससे बरसाती पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हो रही है।"
क्षेत्रीय उपेक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप
"वर्ष 2006 के बाद से विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने या क्षेत्रीय विकास के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया।"
इस समस्या को लेकर वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी द्वारा 13 फरवरी को विधानसभा में भी मुद्दा उठाया था, जिससे क्षेत्र में इस मामले को लेकर विरोध तेज हो गया है।
प्रदर्शन में शामिल गणमान्य नागरिक
इस मोके पर निम्नलिखित व्यक्ति मौजूद रहे:
- बाबूलाल डांगी (वल्लभनगर मंडल अध्यक्ष)
- हीरालाल अहीर (महामंत्री)
- मुकेश नागदा (विधायक प्रतिनिधि)
- कैलाश जणवा, विकास धाकड़, निर्मल प्रजापत, हीरालाल जणवा, झमक लाल लोहार, सुरेश जणवा आदि।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
ग्रामीणों की मांग है की 56 बीघा से अधिक भूमि का आवंटन निरस्त किया जाए, भटेवरिया तालाब में सीवरेज का पानी तत्काल बंद कराया जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
साथ ही, मांग की गई है कि अतिरिक्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर पुनः ग्राम पंचायत को सुपुर्द किया जाए।

Pratahkal Bureau
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