सीमलवाड़ा में अतिक्रमण हटाओ अभियान: एसडीएम के नेतृत्व में पुलिस की सख्त कार्रवाई
एसडीएम विवेक गुर्जर के नेतृत्व में सीमलवाड़ा कस्बे को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम शुरू, व्यापारियों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में सौंपा ज्ञापन।

सीमलवाड़ा। कस्बे की सड़कों पर बढ़ते दबाव और सार्वजनिक स्थानों पर पसरे वर्षों पुराने अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने अब निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। दुकानों के बाहर अवैध कब्जे के कारण आमजन और वाहन चालकों को हो रही असहनीय समस्याओं को देखते हुए शुरू किए गए इस 'अतिक्रमण हटाओ अभियान' ने कस्बे में खलबली मचा दी है। उपखंड अधिकारी विवेक गुर्जर के नेतृत्व में संचालित इस विशेष मुहिम में तहसीलदार अशोक शाह, डिप्टी मदनलाल विश्नोई एवं थानाधिकारी देवेंद्र देवल की संयुक्त टीम लगातार मोर्चा संभाले हुए है, जिससे अतिक्रमणकारियों में हड़कंप व्याप्त है।
प्रशासनिक अमले ने दो-टूक शब्दों में सभी व्यापारियों को आगाह किया है कि वे स्वेच्छा से अपनी दुकानों के बाहर फैलाए गए सामान को तत्काल हटा लें और सार्वजनिक मार्ग को बाधित करना बंद करें। अधिकारियों ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि कस्बे की यातायात व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके। इसी कड़ी में सोमवार को कस्बे के व्यापारियों ने अपनी चिंताओं को लेकर उपखंड अधिकारी विवेक गुर्जर को एक ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों का तर्क है कि वे प्रशासन के निर्देशों का निष्ठापूर्वक पालन कर रहे हैं और पिछले कुछ दिनों तक सभी अपनी तय सीमा में भी रहे, किंतु पुलिस की हालिया कार्यप्रणाली ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
व्यापारियों ने अवगत कराया कि बीते कुछ दिनों से जब कतिपय कारणों से सामान सीमा से बाहर दिखा, तो पुलिस बल ने सख्त्ती दिखाते हुए दुकानों के भीतर सामान रखवाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान हेड कांस्टेबल चेतन लाल, हितेश पाटीदार, डायालाल और कल्पेश पाटीदार मौके पर मौजूद रहे और प्रशासनिक अनुशासन को कड़ाई से लागू किया। व्यापारियों और प्रशासन के बीच उपजे इस गतिरोध ने कस्बे के माहौल को गर्मा दिया है। एक ओर जहाँ प्रशासन कस्बे के सौंदर्यीकरण और सुगम आवागमन के लिए कटिबद्ध नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की इस सख्त कार्रवाई ने स्थानीय व्यापारिक संगठनों को अपनी समस्याओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। यह अभियान न केवल सीमलवाड़ा की सड़कों की सूरत बदलने वाला साबित होगा, बल्कि भविष्य में व्यापारिक अनुशासन के लिए एक बड़ी नजीर पेश करेगा।

