पुराना बस स्टैंड स्थित टांक कलेक्शन के विशाल सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। कथा स्थल “आलकी पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भजन-कीर्तन तथा नृत्य के माध्यम से कृष्ण जन्मोत्सव की आनंदमयी अनुभूति में सराबोर हो गए।

कथा प्रवक्ता जगदीश व्यास ने बताया कि वृंदावन के प्रसिद्ध कथा वाचक श्री अंकित महाराज ने व्यासपीठ से पांडवों के राजसूय यज्ञ, शिशुपाल वध, भक्त प्रहलाद, नरसिंह अवतार, गजेन्द्र मोक्ष, राजा बलि-वामन अवतार तथा भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि द्वैत और अद्वैत दर्शन ही राजसूय यज्ञ का स्वरूप है। साथ ही मनुष्य के सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण की व्याख्या करते हुए श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, सख्य तथा आत्मनिवेदन को नवधा भक्ति का आधार बताया।

कथावाचन के दौरान युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ, श्रीकृष्ण द्वारा अतिथियों के स्वागत, शिशुपाल के सौ अपराध पूर्ण होने पर सुदर्शन चक्र से उसके वध तथा द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण की उंगली पर वस्त्र बांधने के प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया गया। भक्त प्रहलाद की अटूट श्रद्धा, हिरण्यकश्यप के अत्याचार और भगवान नरसिंह के प्रकट होकर उसके वध की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

महाराजश्री ने गजेन्द्र मोक्ष और राजा बलि के दान की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगकर राजा बलि को पाताल का राजा बनाया था तथा केरल में मनाया जाने वाला ओणम पर्व राजा बलि के स्वागत और स्मरण का प्रतीक माना जाता है।

कथा के विशेष आकर्षण के रूप में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। वासुदेव-देवकी, कंस और नंद बाबा से जुड़े प्रसंगों का सजीव वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई गई। इस अवसर पर वासुदेव की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भजन-कीर्तन और नृत्य कर जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।

कार्यक्रम के दौरान रतनलाल, प्रेमलता, पुष्पाबाई, नर्मदा, शांतिलाल, माधवलाल, तारा, ओमप्रकाश व्यास, पुष्पेन्द्र व्यास, लीलाधर, विनय, मुकेश, राजकुमार, सुमन, मोना देवी, संगीता, करुणा और दलजी सहित अनेक श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर सामूहिक रूप से तीन बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया। कथा का समापन महाआरती के साथ हुआ, जिसके बाद महाप्रसाद के रूप में पंजरी, केला, जामुन, आम, पंचामृत और कृष्ण-सुदामा की खिचड़ी का वितरण किया गया।

श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत इस आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जोड़ने का कार्य किया, बल्कि सामूहिक भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी प्रभावी संदेश दिया।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

दिनेश कुमार जैन पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी और विश्वसनीय नाम हैं। उन्होंने पिछले लगभग 8 वर्षों से प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनहित से जुड़े मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकारों तथा स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

उन्होंने जनवरी 2020 से प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक नवज्योति में संवाददाता, खेरवाड़ा एवं नयागांव ब्लॉक (जिला उदयपुर) के रूप में कार्य करते हुए तहसील एवं ब्लॉक स्तर की खबरों को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाया। इससे पूर्व वे लगभग दो वर्षों तक राजस्थान पत्रिका से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

खेरवाड़ा, नयागांव तथा आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं, विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं सामाजिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ रही है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहित आधारित पत्रकारिता उनकी पहचान है।

वर्तमान में प्रातःकाल के साथ जुड़कर वे अपने व्यापक अनुभव और क्षेत्रीय समझ के माध्यम से पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावशाली समाचार पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य समाज की आवाज को सशक्त मंच प्रदान करना तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है।

Next Story