खेरवाड़ा के पुराना बस स्टैंड स्थित टाक कलेक्शन हॉल में स्वर्गीय ज्ञानचंद टांक की स्मृति में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का तीसरा दिन आध्यात्मिक चेतना और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुआ। चित्रकूट धाम के प्रसिद्ध कथाव्यास अंकित महाराज द्वारा प्रस्तुत कथा के इस चरण में सृष्टि के रहस्यों, भगवान के अवतारों और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग का अत्यंत भावपूर्ण विवेचन किया गया। कथा के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु उस समय मंत्रमुग्ध हो गए जब कथाव्यास ने भगवान विष्णु के वराह अवतार, ध्रुव चरित्र और कपिल मुनि द्वारा माता देवहूति को दिए गए ज्ञान का विस्तृत वर्णन किया।

कथाव्यास ने सृष्टि रचना और भगवान विष्णु द्वारा पृथ्वी की रक्षा के लिए धारण किए गए वराह अवतार के प्रसंग को धर्म और सृष्टि संरक्षण का आधार स्तंभ बताया। उन्होंने ध्रुव चरित्र के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि मात्र पांच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव ने जिस अटूट संकल्प और तपस्या का परिचय दिया, वह मनुष्य को दृढ़ निश्चय और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की सीख देता है। इसी क्रम में विदुर-मैत्रेय संवाद के जरिए जीव, जगत, ज्ञान और वैराग्य के रहस्यों को उद्घाटित किया गया। साथ ही, कपिल मुनि के सांख्य योग और मोक्ष मार्ग के उपदेशों ने उपस्थित श्रोताओं को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराया। कथा के समापन पर भजनों और प्रभु के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि सांसारिक मोह-माया से परे ईश्वर की सच्ची आराधना ही परम सुख का मार्ग है।

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Pratahkal Newsroom

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