श्री राम मंदिर में दिव्य राम कथा के नवें दिन केवट प्रसंग पर भावुक हुए श्रद्धालु
मध्य प्रदेश के कथा वाचक श्री वीरेंद्र शास्त्री ने केवट प्रसंग और सुमंत्र के विलाप का मार्मिक वर्णन किया, महाआरती के बाद प्रसाद का वितरण हुआ।

नगर के प्रसिद्ध श्री राम मंदिर में आयोजित दिव्य राम कथा के नवें दिन महाआरती के दौरान भगवान की आराधना करतीं महिला श्रद्धालु।
पुरुषोत्तम मास के अवसर पर नगर स्थित प्रसिद्ध श्री राम मंदिर में आयोजित दिव्य राम कथा के नवें दिन भक्ति, करुणा और आध्यात्मिक भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध कथा वाचक श्री वीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और केवट के अद्वितीय भक्तिभाव के साथ-साथ सुमंत्र के करुण विलाप का मार्मिक वर्णन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को राममय वातावरण में डुबो दिया।
खचाखच भरे सभागार में कथा के दौरान दिव्य राम कथा के प्रवक्ता जगदीश व्यास ने केवट प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान राम जहां समस्त जीवों को भवसागर से पार लगाने वाले हैं, वहीं केवट गंगा पार कराने वाला साधारण नाविक है। इसी आध्यात्मिक समानता के कारण दोनों के बीच आत्मीय संबंध स्थापित होता है। उन्होंने बताया कि भक्ति के स्तर पर ईश्वर और भक्त के बीच किसी प्रकार का भेद नहीं होता तथा परमात्मा की प्राप्ति के लिए निष्कपट प्रेम और पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ा साधन है।
कथा में वनगमन के दौरान गंगा तट पर पहुंचे भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि केवट ने प्रभु के चरण धोए बिना उन्हें नाव में बैठाने से विनम्रतापूर्वक इंकार कर दिया। चरण पखारने के बाद उसने उस पावन चरणामृत को अपने परिवार सहित ग्रहण किया। गंगा पार कराने के उपरांत जब माता जानकी ने उतराई स्वरूप अंगूठी भेंट करनी चाही तो केवट ने किसी प्रकार का धन स्वीकार करने के बजाय प्रभु से मोक्ष की कामना की। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति और समर्पण के आदर्श स्वरूप से परिचित कराया।
इसके पश्चात कथा में सुमंत्र के अयोध्या लौटने का अत्यंत भावुक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। भगवान राम को वन में छोड़कर लौटे सुमंत्र जब राजा दशरथ और अयोध्यावासियों को वनगमन का समाचार सुनाते हैं तो वे स्वयं भी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते। इस समाचार को सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं और संपूर्ण अयोध्या शोक में डूब जाती है। कथा के इस करुण प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।
कथा के मध्य श्री वीरेंद्र शास्त्री ने अनेक भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी, जिन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन महाआरती के साथ हुआ, जिसके बाद आइसक्रीम एवं कुल्फी के महाप्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।

Pratahkal Bureau
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