नगर के प्रसिद्ध श्री राम मंदिर के विशाल सभागार में पंद्रह दिनों से चल रही दिव्य रामकथा का भव्य समापन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के भावपूर्ण प्रसंग के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर पूरा सभागार श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और भक्ति, श्रद्धा तथा उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कथा के अंतिम दिन मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध कथावाचक वीरेंद्र शास्त्री ने मेघनाद, कुंभकरण एवं रावण वध से लेकर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक तक की घटनाओं का विस्तृत और प्रेरणादायी वर्णन किया। दिव्य रामकथा के प्रवक्ता जगदीश व्यास ने बताया कि व्यासपीठ से संबोधित करते हुए शास्त्री ने मेघनाद को मोह, माया और शक्ति का प्रतीक, कुंभकरण को अज्ञानता एवं जड़ता का तथा रावण को अहंकार, अज्ञान और वासना का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि मेघनाद को ब्रह्माजी से ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसका वध वही कर सकता था जो 14 दिन तक न खाए, न पिए और न सोए। लक्ष्मणजी ने तपस्वी जीवन के बल पर विवेक और ज्ञान से मेघनाद का संहार किया। वहीं कुंभकरण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वह अज्ञान रूपी गहरी निद्रा का प्रतीक था। सीता हरण को अधर्म मानने के बावजूद भ्रातृ मोह के कारण वह युद्ध में उतरा और भगवान श्रीराम के हाथों उसका वध हुआ।

कथावाचक ने रावण के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि वह अत्यंत विद्वान और वेदों का ज्ञाता था, लेकिन अहंकार और वासना ने उसके पतन का मार्ग प्रशस्त किया। विभीषण द्वारा नाभि में अमृत होने का रहस्य बताए जाने के बाद भगवान श्रीराम ने 31 बाणों से रावण का वध किया।

रामकथा के समापन पर भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शास्त्री ने बताया कि वनवास पूर्ण कर जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तो पूरी नगरी दीपों से आलोकित हो उठी। इसी घटना से दीपावली पर्व मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई। गुरु वशिष्ठ एवं अन्य ऋषियों द्वारा संपन्न राज्याभिषेक के बाद अयोध्या में शांति, समृद्धि, न्याय और समानता का युग स्थापित हुआ, जिसे आज भी रामराज्य के रूप में स्मरण किया जाता है।

समापन समारोह में श्रद्धालुओं एवं गणमान्य नागरिकों ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की महाआरती कर पुष्पवर्षा की। इस अवसर पर तारा, निर्मला, कांता, देवी, जयाबेन, संतोष, शीतल, प्रियंका, गणेशलाल, बजरंगलाल, अवधेश, प्रमोद, ललित, महावीर, शांतिलाल, लक्ष्मी अहारी, सरपंच ओमप्रकाश, सूर्या, जयेश, पुष्पेंद्र, लीलाधर, रमेशचंद्र, नरेश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में महाप्रसाद वितरण के साथ दिव्य रामकथा का विधिवत विसर्जन किया गया।

राम राज्याभिषेक के इस भावपूर्ण समापन ने श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा, न्याय और आदर्श जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

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