थोबावाड़ा में श्रीराम कथा: श्री पुष्कर दास महाराज ने दी सत्संग की महिमा
उदयपुर की झाड़ोल तहसील में आयोजित कथा के तीसरे दिन राम जन्मोत्सव मनाया गया, महाराज ने कन्या भ्रूण हत्या को रोकने का आह्वान किया।

उदयपुर जिले के ग्राम थोबावाड़ा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन भगवान राम का जन्मोत्सव मनाते श्रद्धालु और प्रवचन देते पुष्कर दास महाराज।
उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के ग्राम थोबावाड़ा में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां राम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा व्यास पूज्य श्री पुष्कर दास महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचनों में कहा कि मनुष्य जन्म प्राप्त करना और सत्संग में बैठने का अवसर मिलना अत्यंत बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने हनुमान जी के उदाहरण से स्पष्ट किया कि वे अत्यंत बढ़भागी थे, जिन्हें प्रभु श्रीराम की सेवा का अवसर मिला। हनुमान का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जिसने अपने मान का हनन किया, वही हनुमान है। महाराज ने कहा कि भजन-कीर्तन केवल मनुष्य जीवन में ही संभव है, इसलिए इस अमूल्य अवसर का सदुपयोग आवश्यक है।
वर्तमान समय की परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि धरती पर पाप बढ़ने के कारण प्रकृति भी रूठती नजर आ रही है। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज नवरात्रि में नौ कन्याओं को भोजन कराना भी कठिन हो गया है और बच्चियों की रक्षा करना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है।
कथा के दौरान भगवान शंकर और माता सती के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि सती द्वारा प्रभु राम की परीक्षा लेने के कारण उन्हें शिवजी से वियोग सहना पड़ा। “होई सोई जो राम रचि राखा” का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की इच्छा सर्वोपरि है।
महाराज ने रामायण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह पवित्र ग्रंथ प्रत्येक घर में होना चाहिए और श्रीराम का जन्म हमारे हृदय में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में मिलने वाले सुख-दुख हमारे कर्मों का परिणाम हैं। साथ ही मनु और शतरूपा के प्रसंग का वर्णन करते हुए राम जन्म कथा का विस्तार किया। उन्होंने कहा कि भगवान समय-समय पर विभिन्न अवतार लेकर धरती पर अवतरित होते हैं और जब कोई जीव सच्चे मन से पुकारता है, तो प्रभु सूक्ष्म रूप में उसकी सहायता के लिए अवश्य आते हैं—“तब-तब धरी प्रभु विविध शरीरा”।
राम जन्मोत्सव के प्रसंग पर “राम सच्चिदानंद दिनेशा” की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान आनंद स्वरूप हैं और कलयुग में कथा, सत्संग तथा भजन के माध्यम से मन निर्मल होने पर ईश्वर का आनंद भीतर प्रकट होता है।
कथा के समापन पर राम जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं, भजनों पर उत्साहपूर्वक नृत्य किया और सामूहिक आरती के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक आस्था को सुदृढ़ करने का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau
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