श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन: मथुरा पहुंची 2800 किमी लंबी पदयात्रा
रामेश्वरम से शुरू हुई 2800 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का मथुरा में समापन, भव्य मंदिर निर्माण के लिए चौथे चरण की होगी घोषणा।

श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा पर भव्य मंदिर निर्माण होकर रहेगा," यह उद्घोष आज कान्हा की नगरी में उस समय गूंज उठा जब श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के तहत तीसरे चरण की पदयात्रा का भव्य समापन हुआ। संयुक्त भारतीय धर्म संसद के कुशल नेतृत्व में आचार्य राजेश्वर महाराज कथा व्यास एवं सर्व ब्राह्मण महासभा के प्रदेश मंत्री सुनील चौबीसा 'अत्रिश' की टीम लगभग 2800 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर प्रातः 11 बजे मथुरा पहुंची। यह यात्रा अब केवल जन जागरण तक सीमित न रहकर एक निर्णायक चरण की ओर अग्रसर हो गई है।
रामेश्वरम से प्रारंभ होकर पंढरपुर के रास्ते मथुरा पहुंची इस यात्रा ने उत्तर, दक्षिण और पश्चिमी भारत के व्यापक क्षेत्रों में जनसंपर्क किया। यात्रा के दौरान देश भर में 125 से अधिक स्थानों पर धर्म सभाओं के माध्यम से जनमानस को जागृत करने का प्रयास किया गया। शनिवार 11 अप्रैल को मथुरा पहुंचने पर सभी यात्रियों ने श्री कृष्ण जन्मभूमि के दर्शन कर मंदिर निर्माण हेतु सामूहिक प्रार्थना की। इसके पश्चात सालिमपुर रोड स्थित केडीएस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित एक विशाल धर्म सभा में यात्रियों का भव्य स्वागत हुआ। इस सभा की अगुवाई श्री कृष्ण जन्मभूमि के हिंदू पक्षकार और श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने की।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर महाराज ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति को आम जनता तक पहुंचाने का मिशन है। उन्होंने घोषणा की कि तीसरे चरण की सफलता के बाद अब चौथे चरण की यात्रा जगन्नाथ पुरी से मथुरा तक आयोजित की जाएगी, जिसके बाद आगामी कठोर कदमों की घोषणा होगी। उन्होंने भारतीयों से आह्वान किया कि अब समय कमर कसने का है। वहीं, हिंदू पक्षकार डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने ऐतिहासिक साक्ष्यों और वर्तमान न्यायिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए बताया कि जन्मभूमि का मुद्दा अब राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है और आगामी समय में इस जन समर्थन को संगठित दिशा दी जाएगी।
वृंदावन स्थित चिंतामणि कुंज के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यनंद महाराज ने यात्रा को समाज को जोड़ने वाला आधार बताया। राजस्थान से आए सुनील चौबीसा 'अत्रिश' ने अपने ओजस्वी संबोधन में गरजते हुए कहा कि यह यात्रा जन्मभूमि की मुक्ति में 'नींव की ईंट' और सामूहिक 'गिलहरी प्रयास' साबित होगी। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को 'घनघोर काली घटा' की संज्ञा देते हुए मंचस्थ मनीषियों से आह्वान किया कि सनातन की रक्षा हेतु अब शिखा खोलने का समय आ गया है। उन्होंने सचेत किया कि लगभग 330 विधर्मी संगठन सनातन संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्हें हिंदू समाज को एकजुट होकर तोड़ना होगा।
नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए पद्मश्री डॉ. लक्ष्मी गौतम ने महिलाओं से घर-घर तक इस आंदोलन की अलख जगाने की अपील की। संत श्यामानंद महाराज ने इसे निरंतर चलने वाला सामूहिक संघर्ष बताया, जबकि हिमालय से आए संत गणेश दास महाराज ने विश्वास व्यक्त किया कि लक्ष्य अब निकट है। मथुरा होटल एसोसिएशन के सचिव आर.वी. चौधरी ने एकजुटता को आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति करार दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह के गुरु दामोदर सिंह ने सभी संतों और यात्रियों का आभार व्यक्त किया। सभा में मौजूद कई वक्ताओं ने जन्मभूमि की मुक्ति हेतु अपने प्राणों की आहुति तक देने का संकल्प दोहराया, जिससे स्पष्ट हो गया कि अब यह आंदोलन हिंदू राष्ट्र के निर्माण और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना की दिशा में एक अपरिहार्य शक्ति बन चुका है।

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