युवाचार्य महेंद्र ऋषि का फतहनगर में भव्य मंगल प्रवेश
श्रमणसंघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी महाराज के पावनधाम आगमन पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई और विशाल धर्मसभा का आयोजन हुआ।

फतहनगर के पावनधाम में गुरुवार को श्रमणसंघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी महाराज और हितेंद्र ऋषिजी महाराज के मंगल प्रवेश के दौरान आयोजित भव्य विहार शोभायात्रा में शामिल जैन साधु और श्रद्धालु।
गुरु अम्बेश मेमोरियल संस्थान पावनधाम, फतहनगर की बहुप्रतीक्षित विनती पर श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी, हितमित भाषी हितेंद्र ऋषिजी सहित ठाणा 4 का गुरुवार को भव्य शोभायात्रा और श्रद्धाभाव से ओतप्रोत मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। इस अवसर पर फतहनगर नगर गुरु भक्ति, धर्मभावना और जयघोषों से गूंज उठा, जहां हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने गुरु भगवंतों की अगवानी कर गुरुभक्ति और समर्पण का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया।
गुरु अम्बेश मेमोरियल संस्थान पावनधाम के महामंत्री दिनेश सिंघवी ने जानकारी देते हुए बताया कि युवाचार्य भगवंत की भव्य विहार शोभायात्रा फतहनगर चौराहे से प्रारंभ हुई, जो बस स्टैंड, सदर बाजार मार्ग एवं जैन स्थानक होते हुए पावनधाम पहुंची। मार्ग में स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं ने जयघोष, वंदन-अभिनंदन एवं धर्ममय वातावरण के साथ गुरु भगवंतों का स्वागत किया।
पावनधाम पहुंचने पर संस्थान के प्रमुख प्रकाश सिंघवी, कोषाध्यक्ष दिनेश सिंघवी, गजेन्द्र चंडालिया, नितीन सेठिया सहित फतहनगर श्रीसंघ के संरक्षक दिनेश सांभर, अध्यक्ष कनकमल बाफना, सम्पतलाल बाफना एवं पदाधिकारियों ने गुरु भगवंतों का श्रद्धापूर्वक अभिनंदन किया।
इस अवसर पर गुरु अम्बेश, सौभाग्य एवं मदन परंपरा के मेवाड़ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे उपप्रवर्तक कोमल मुनिजी, उपप्रवर्तिनी विजयप्रभा महासती, विद्याश्री उपप्रवर्तिनी दिव्य ज्योति जी, महासती सुचेता जी, साध्वी महिमाश्री, साध्वी ऐष्णाश्री सहित साधु-साध्वीवृंद ने भी जयघोषों के साथ युवाचार्यश्री का वंदन-अभिनंदन किया।
आयोजित विशाल धर्मसभा में युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने कहा कि गुरु का सान्निध्य केवल बाहरी निकटता नहीं, बल्कि आत्मजागरण का मार्ग है। जो गुरु के हाथ को थामकर चलता है, वही जीवन का वास्तविक प्रकाश प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन का निर्माण संभव नहीं, क्योंकि गुरु जीवन को दिशा, दृष्टि और साधना का आधार प्रदान करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल ज्ञान और सिद्धांतों को पढ़ लेने से आत्मबोध नहीं होता, बल्कि गुरु की अनुभूति और मार्गदर्शन से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है। पावनधाम में प्रवेश करते हुए यहां की दिव्यता और गुरु अम्बेश की अदृश्य आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव हुआ। यह स्थान केवल भवन नहीं, बल्कि साधना, श्रद्धा और आत्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
युवाचार्यश्री ने गुरु परिवार एवं धर्मसंघ के प्रति समर्पण और एकता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि महापुरुषों के आशीर्वाद और उनकी वाणी समाज की वास्तविक पूंजी है। उन्होंने पावनधाम को केवल वंदन का स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, दर्शन और चारित्र की साधना का केंद्र बताया।
उन्होंने कहा कि केवल शरीर को नमन करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और तपमय जीवन को आत्मसात करना ही वास्तविक वंदना है। उन्होंने गुरु अम्बेश स्मृति धाम को श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बताते हुए गुरुजनों के उपकार और प्रेरणा को जीवन का आधार बताया तथा श्रद्धा, संस्कार और गुरु परंपरा की चेतना को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर उपप्रवर्तक कोमल मुनिजी ने युवाचार्यश्री के प्रति भावपूर्ण श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी भावना है कि वे चातुर्मासकाल में धर्म, साधना और संयम के गूढ़ सूत्रों को निकट से सीखने का सौभाग्य प्राप्त करें तथा उनके सान्निध्य में रहकर जीवन को संस्कारित करने की साधना करें।
मंगल प्रवेश एवं धर्मसभा में मेवाड़ भवन ट्रस्ट मुंबई के संरक्षक चतरलाल लोढ़ा, रोशनलाल बड़ाला, अध्यक्ष इन्द्रमल बड़ाला, विजय कोठारी, नरेन्द्र नवलखा, पथिक विहार धाम के अध्यक्ष मांगीलाल लोढ़ा, अम्बाशोध संस्थान के अध्यक्ष ललित लोढ़ा, धर्मज्योति परिषद के संरक्षक कंवरलाल सूरिया, प्रेमसज्जन संस्थान के अध्यक्ष सुरेश सूरिया, मेवाड़ युवक मंडल के बबलू रांका, जैन कॉन्फ्रेंस राजस्थान प्रांत के अध्यक्ष आनन्द चपलोत, कुमुद ज्ञानोदय ट्रस्ट के अध्यक्ष चौथमल सांखला, चंदनबाला महिला मंडल की शालिनी तातेड़ सहित भादसोड़ा, कांकरोली, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सूरत, अहमदाबाद, गंगापुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में गुरु अम्बेश मेमोरियल संस्थान पावनधाम के प्रमुख प्रकाश सिंघवी ने सभी संत-साध्वीवृंद, अतिथियों, पदाधिकारियों एवं दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि युवाचार्यश्री एवं गुरु भगवंतों के मंगल प्रवेश से पावनधाम की पावनता और अधिक आलोकित हुई है, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।

Pratahkal Bureau
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