श्री द्वारिकाधीश महिला मंडल के तत्वावधान में मुद्द्गल वाटिका में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा-शिरोमणि व्यास पं. माणक चन्द मेनारिया के अमृतमय प्रवचनों से वातावरण शिवमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पार्थिव शिवलिंग के निर्माण एवं षोडशोपचार पूजन से हुई। इसके पश्चात दोपहर 2 बजे ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया।

कथा के आरंभ में व्यासजी ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तृत वर्णन किया तथा मेवाड़ के प्रमुख धार्मिक धामों—एकलिंगनाथ मंदिर, केसरिया नाथजी मंदिर, चारभुजा नाथ मंदिर एवं श्रीनाथजी मंदिर—का श्रद्धापूर्वक स्मरण कराया।

कथा के दौरान सती प्रसंग एवं दक्ष यज्ञ का मार्मिक वर्णन किया गया। इसमें सती द्वारा माया-सीता रूप धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने, भगवान शिव द्वारा सती त्याग का संकल्प, तथा प्रजापति दक्ष के यज्ञ में हुए अपमान से आहत होकर सती के योगाग्नि में देह त्याग का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात महाकाली एवं वीरभद्र द्वारा दक्ष यज्ञ के विध्वंस तथा सती के अंगों से शक्तिपीठों की स्थापना का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।

आगे कथा में पार्वती जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसमें हिमाचलराज के यहां माता पार्वती का जन्म, देवर्षि नारद की भविष्यवाणी, भगवान शिव को प्राप्त करने हेतु पार्वती की कठोर तपस्या तथा भगवान शिव की अलौकिक बारात का रोचक वर्णन किया गया। अंततः शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के साथ कथा का विश्राम हुआ, जिससे श्रद्धालु गहन भावनाओं से भर उठे।

भीषण गर्मी को देखते हुए आयोजकों द्वारा कथा पंडाल में शीतल जल फुहार (फॉगिंग) एवं कूलरों की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को राहत मिली। सायं 5 बजे महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।

यह श्री शिव महापुराण कथा 31 मई तक निरंतर जारी रहेगी।

Pratahkal Bureau

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