फतहनगर, 27 मई। श्री द्वारिकाधीश महिला मंडल के तत्वावधान में मुद्द्गल वाटिका परिसर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर बुधवार को अपार जनसमूह उमड़ा, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्ति और श्रद्धा के सागर में निमग्न नजर आया। कथा व्यास पं. माणक चंद जी मेनारिया ने भगवान शिव की अलौकिक लीलाओं का अत्यंत रसपूर्ण एवं भावपूर्ण वर्णन कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुई। दोपहर 2 बजे से आरंभ हुई कथा में श्रद्धालुओं की व्यापक उपस्थिति रही। इस दौरान व्यासश्री ने पार्थिव शिवलिंग के विशेष आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि शिवलिंग पर अर्पित किए गए जल का सेवन करना अमृत के समान पुण्यदायी है। कथा के मुख्य आकर्षण के रूप में रुद्र संहिता के अंतर्गत नारद-मोह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और व्याख्यात्मक वर्णन किया गया।

व्यासश्री ने सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के एकमात्र अधिष्ठाता के रूप में भगवान शिव की महिमा को रेखांकित किया। उन्होंने नारद-विष्णु संवाद तथा नारद मुनि को प्राप्त शाप की कथा के माध्यम से शिव तत्व को स्पष्ट किया। कथा के क्रम में सृष्टि रचना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों, जिनमें जगदंबा का प्राकट्य, भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा की उत्पत्ति, मनु-शतरूपा, देवहूति, कुबेर, कामदेव, अरुंधती-वशिष्ठ एवं सती अवतार तक की कथाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया।

भीषण गर्मी की स्थितियों के दृष्टिगत आयोजकों ने कथा स्थल पर शीतल जल फुहार (फॉगिंग) एवं कूलरों की प्रभावी व्यवस्था की, जिससे श्रद्धालुओं को राहत प्राप्त हुई। सायं 5 बजे महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके पश्चात उपस्थित भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया। यह आध्यात्मिक शिव महापुराण कथा 31 मई तक प्रतिदिन अनवरत जारी रहेगी।

Pratahkal Newsroom

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