शरद पूर्णिमा पर तीन महान जैन संतों का अवतरण: विद्यासागर जी, समयसागर जी और ज्ञानमती माताजी
शरद पूर्णिमा पर आचार्य विद्यासागर जी, समयसागर जी और गणिनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी के अवतरण प्रसंग से संपूर्ण जैन समाज में उत्साह का माहौल है।

शरद पूर्णिमा पर आचार्य विद्यासागर जी, समयसागर जी व ज्ञानमती माताजी के जन्मोत्सव का संदेश।
कोटा (राज.)। शरद पूर्णिमा की पावन तिथि जैन धर्म की तीन महान संत विभूतियों के अवतरण के कारण विशेष महत्व रखती है। शास्त्रों में शरद पूर्णिमा की रात को अमृत वर्षा की रात कहा गया है। चंद्रमा की सोलह कलाओं से पूर्ण इस दिव्य तिथि पर संत शिरोमणि आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य 108 श्री समयसागर जी महाराज और परम पूज्य गणिनी आर्यिका शिरोमणि 105 ज्ञानमती माताजी के अवतरण का पावन प्रसंग जैन समाज में हर्ष और उत्साह का वातावरण बनाता है। इन तीनों महान विभूतियों ने नर से नारायण, पाषाण से परमात्मा, तिर से तीर्थंकर और मानव से महामानव बनने की यात्रा का मार्ग प्रशस्त करते हुए जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया। उन्होंने संसार, शरीर और भोगों के मोह से दूर होकर संयम, तप, त्याग और साधना के मार्ग को अपनाने की प्रेरणा दी तथा जैन धर्म की प्रभावना को नई दिशा प्रदान की।
विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे राष्ट्र गौरव पारस जैन "पार्श्वमणि", पत्रकार, कोटा ने बताया कि इस पावन प्रसंग पर संपूर्ण भारतवर्ष के सकल जैन समाज में हर्ष और उत्साह का माहौल है।
संत शिरोमणि आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज
आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज संयम, तप, त्याग और साधना की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। पिता श्री मल्लप्पा जी और माताजी के दुलारे विद्यासागर ने बचपन से ही आध्यात्मिक संस्कारों की राह अपनाई। तरुणाई में ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने के बाद उन्होंने गुरु ज्ञानसागर जी से दीक्षा ली और संसार, शरीर तथा भोगों से अपना नेह हटाकर मुक्ति पथ को अपनाया।
उनकी वाणी में भेद-विज्ञान का अमृत कलश बरसता था। वे श्री महावीर स्वामी के लघुनंदन कहलाए। उन्होंने श्रमण संस्कृति को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। उनके जीवन, कृतित्व और व्यक्तित्व का विस्तार इतना व्यापक है कि उसे शब्दों में समेटना कठिन है। अपने जीवनकाल में उन्होंने न जाने कितने जीवों के जीवन को जीवंत किया और उन्हें आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
आचार्य 108 श्री समयसागर जी महाराज
आचार्य 108 श्री समयसागर जी महाराज संत शिरोमणि विद्यासागर जी महाराज के प्रथम शिष्य हैं। वे आगम के मर्मज्ञ हैं और समय के सार को समझाने की कला में निपुण हैं। जैन दर्शन के गूढ़ रहस्यों को सरल शैली में समझाने की उनकी अद्भुत क्षमता के कारण उनके समक्ष हर उपमा छोटी पड़ जाती है। वे साक्षात गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज की प्रतिकृति प्रतीत होते हैं।
आचार्य समयसागर जी महाराज विनम्रता के साथ कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं आता और उन्होंने जो कुछ भी सीखा है, वह गुरुदेव के पाद-मूल में बैठकर सीखा है। वर्तमान समय में धर्मप्राण नगरी भोपाल में उनका चातुर्मास हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में चल रहा है।
परम पूज्य गणिनी आर्यिका शिरोमणि 105 ज्ञानमती माताजी
परम पूज्य गणिनी आर्यिका शिरोमणि 105 ज्ञानमती माताजी जैन धर्म की नारी रत्न और जैनागम की महान विदुषी हैं। उन्होंने हजारों ग्रंथों की रचना की और जम्बूद्वीप जैसे महान तीर्थ का निर्माण कर जैन इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। वे प्रज्ञा, करुणा और वात्सल्य की साक्षात मूर्ति हैं।
ज्ञानमती माताजी ने तीर्थंकरों के जन्मस्थलों को अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मांगीतुंगी तीर्थराज में भगवान आदिनाथ की 108 फीट ऊंची विशाल मूर्ति विराजमान कर मंदिर का निर्माण कराया और विश्व कीर्तिमान स्थापित किया।
एक तिथि, तीन प्रेरणा पुंज
शरद पूर्णिमा की एक ही तिथि पर इन तीन महान विभूतियों का जन्म लेना केवल संयोग नहीं, बल्कि महायोग के रूप में देखा जाता है। जिस प्रकार शरद पूर्णिमा का चंद्रमा शीतलता प्रदान करता है, उसी प्रकार इन तीनों महान संतों ने संसार के ताप से संतप्त जीवों को धर्मामृत का संदेश दिया। उनके जीवन और साधना ने संयम, त्याग, तप तथा आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग को नई प्रेरणा प्रदान की।
इस पावन जन्म त्रयोदशी पर सभी श्रद्धालु इन महान संतों के चरणों में नित वंदन बारंबार करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
प्रस्तुति: राष्ट्र गौरव पारस जैन "पार्श्वमणि", पत्रकार, कोटा (राज.), 9414764980।

Dharnendra Jain( Kherwara)
नाम: धरणेन्द्र जैन
वर्तमान पद: सीनियर रिपोर्टर (प्रातः काल दैनिक, खेरवाड़ा विधानसभा)
कार्यक्षेत्र: खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (खेरवाड़ा, ऋषभदेव, और नयागांव उपखंड क्षेत्र, जिला उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों की खबरें
अनुभव: 30 वर्ष से अधिक
परिचय
धरणेन्द्र जैन उदयपुर जिले के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल दैनिक' में सीनियर रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मुख्य रूप से खेरवाड़ा, ऋषभदेव और नयागांव उपखंड क्षेत्र को कवर करते हैं। धरणेन्द्र जैन राजनीति, क्राइम, स्थानीय प्रशासन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख विषयों पर नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
धरणेन्द्र जैन को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों (30 वर्ष) से अधिक का व्यापक और लंबा अनुभव है:
- वह साल 1995 से पत्रकारिता क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
- उन्होंने वर्ष 1998 से 2018 तक लगातार 20 वर्षों तक 'दैनिक भास्कर' में खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए सीनियर रिपोर्टिंग की है।
- वर्ष 2018 से वह लगातार 'प्रातः काल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
